Thursday, 2 February 2017

Vasant/Spring Poem/ वसंत ऋतु

दोस्तों , मेरा पहला ब्लॉग वसंत ऋतु को समर्पित ।

ऋतुराज वसंत

चारों ओर हरियाली है, 
नए फूल नई डाली है,
झूम रहा हर पत्ता-पत्ता, 
प्रकृति में खुशहाली है,
पतझड़ का करके अंत, 
देखो आया ऋतुराज वसंत।

प्रकृति का यौवन निखरे, 
खुशियों के अमृत बिखरे,
रंग बिरंगे फूल खिले, 
जीवन को नव रक्त मिले,
पीछे छूट गया हेमंत, 
देखो आया ऋतुराज वसंत।



नई उमंगें, नई तरंगें, 
ले कर नए नए त्योहार,
सुप्त धमनियों में मानव के, 
करता नया रक्त संचार,
ऊर्जा जग में भरे अनंत, 
देखो आया ऋतुराज वसंत। 

खूब सुनहरी धूप खिली, 
बागों में कोयल बोली,
बनी धरा जैसे दुल्हन, 
सजी धजी इसकी डोली,

खुशियों की सौगात अनंत, 
लेके आया ऋतुराज वसंत। 


23 comments:

Kumar Gaurav Tiwari said...

Ati sundar.....bahut badhai..

dil se... said...

बहुत सुंदर ...मौसम के अनुकूल ... सामयिक रचना .. बधाई

dil se... said...

बहुत सुंदर ...मौसम के अनुकूल ... सामयिक रचना .. बधाई

Deepak Satya said...

अच्छा प्रयास है। उम्मीद है की वसंत में आपके ब्लॉग और भी निखरेंगे।

Santosh Kumar Yadav said...

Very nice sir... Keep it up...

Sharda Mittal said...

Bahut hi sunder

Santosh Garg said...

बनी धरा जैसे दुल्हन
बधाई हो सत्य जी

Parminder said...

अति सुन्दर, बिल्कुल बसंत जैसा!

नेहा शर्मा 'नेह' said...

बसंत का अति सुन्दर विवरण.....

satrupa said...

thanks for feed back

Anonymous said...

What a lovely great poem

jindagi said...

Bahut achha likhe!! Keep it up!!

Unknown said...

Great poem

Unknown said...

Very beautiful lines on basant

Unknown said...

Great Sir👍

Unknown said...

Bahut sundar

Unknown said...

बहुत सुन्दर रचना...

Anonymous said...

Awesome Sir

chandrashekhar kumar said...

Bahut sunder

Anonymous said...

Amazing 🙏

Anonymous said...

बहुत खूब
मन भयो वसंत तन भयो वसंत

Vatsa 74 said...

अति सुंदर
मन भयो वसंत तन भयो वसंत
तू भी वसंत मैं भी वसंत
आओ बनायें जहाँ वसंत

Anonymous said...

Super sir