Thursday, 12 March 2026

श्रीनगर का ट्यूलिप गार्डन एक बार जरूर जाएं..

यात्रा अनुभव .

 (मन को छुए बगैर नहीं रहता ट्यूलिप गार्डन)

 जम्मू कश्मीर का विश्व प्रसिद्द ट्यूलिप गार्डन 16 मार्च से आम जनता और पर्यटकों के लिए खुल जाएगा  जो अगले बीस दिनों तक पर्यटकों के मन को प्रफुल्लित करता रहेगा  

कश्मीर अपने प्राकृतिक खुबसूरती के लिए जाना जाता है और इसे धरती का स्वर्ग भी कहा जाता है। प्रकृति ने यहाँ जी भर के अपना सौंदर्य लुटाया है। 

 


यहाँ की खुबसूरती इस शहर को  देश का सर्वश्रेष्ठ पर्यटक स्थल बनती है।  सदियों से यह शहर डल झील , हरी भरी वादियोंवर्फीली पहाड़ियों तथा अपने सुन्दर बगीचों के लिए पहचाना जाता था जो अब ट्यूलिप गार्डन के लिए पहचाना जाने लगा है।  वर्तमान कश्मीर में ट्यूलिप गार्डन अपनी नैसर्गिक सुंदरता के कारण शहर की खुबसूरती में चार चाँद लगता है। ट्यूलिप गार्डन को हाल ही में वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में शामिल किया गया हैं 

  एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डेन इन्दिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डेन प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी मार्च -अप्रैल में पर्यटकों के लिए खुला रहेगा। कुछ साल पहले तक फिल्मों में  दिखाये जाने वाले हालैण्ड के ट्यूलिप गार्डन को देख कर वहाँ घूमने की मेरी इच्छा कभी पूरी नहीं हो पाई थी परंतु श्री नगर में इस गार्डन के निर्माण के बाद ट्यूलिप गार्डन देखने का सपना अब सपना नहीं वल्कि हकीकत का रूप ले चुका था ।

 कुछ वर्ष पहले मुझे भी कुछ मित्रों के साथ पहली बार ट्यूलिप गार्डन देखने का मौका मिला। डल गेट से टैक्सी में बैठ कर जैसे ही हम आगे बढे,  लेक में तैरता शिकारा और आस पास का नजारा एक बहुत ही सुन्दर दृश्य प्रस्तुत कर रहा था ।

 

मुख्य शहर से डल लेक के साथ रास्ते में आए अनेकों मनोरम दृश्यों को देखते हुये तथा ठंढी हवा का आनंद लेते हुए हम लोग काफी रोमांचित थे और इसकी सुन्दरता को अपने आँखों के साथ साथ अपने कैमरे में भी कैद करते जा रहे थे । 


जब 9 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद हम इस गार्डन में पहुंचे तो ऐसा लगा मानो अब तक हमने जो भी देखा थावह इस गार्डन की सुंदरता के सामने कुछ भी नहीं था । इस गार्डन के बारे में जो जानकारी मिली उसके अनुसार, जब्रवान  पहाड़ियों की तलहट्टी में 90 एकड़ से भी अधिक क्षेत्र में फैले इस सुंदर गार्डन का निर्माण कश्मीर पर्यटन को बढ़ावा देने के उदेश्य से 2007 ई में कराया गया। श्री नगर में मुगल काल के बाद का यह सबसे बेहतर निर्माण कार्य है। इसमें 70 से अधिक किश्मों के 20 लाख से अधिक ट्यूलिप के फूल एक बार में देखे जा सकते है।यहाँ अलग अलग क्यारियों में खिले लालपीलेसफेदनीलेगुलाबीबैंगनीहरेनारंगी आदि विभिन्न रंगों के ट्यूलिप मन को मोह लेते है । 

डल झील के किनारे बने इस गार्डन को पहले सिराज बाग के नामे से जाना जाता था जो 2008 ई के बाद ट्यूलिप गार्डन के नाम से देश विदेश में विख्यात हो गया।  मात्र आठ वर्ष के अंदर की यह उद्यान कश्मीर की नई पहचान बन गई है।

 शालीमार , निशात गार्डन तथा चश्मेशाही आदि तो पहले भी देखे थे किन्तु इस गार्डन को देखने के बाद समझ में आया की क्यों इसने अन्य सभी गार्डन को पीछे छोड़ दिया है। अपनी अद्वितीय सुंदरता के कारण यह गार्डन देश विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस गार्डन की मोहकता एवं लोकप्रियता के कारण प्रत्येक वर्ष लगभग 2 लाख से अधिक पर्यटक इस गार्डन को देखने के लिए श्री नगर आते हैं।

 जब हम इन ट्यूलिप के सतरंगी क्यारियों को दूर से देखते है तो ये हमें एक इंद्रधनुष का दृश्य प्रस्तुत करता हैं। सदियों से डल झील तथा अन्य बागों के लिए पहचाना जाने वाला श्री नगर को अब ट्यूलिप गार्डन के लिए पहचाना जाने लगा है। वसंत ऋतु में खिलने वाला यह फूल गंध रहित होता है परंतु अपने मनमोहक रंगो एवं एकरूपता के कारण सभी को अपनी ओर आकर्षित करता है।  इन फूलों का जीवन काल 15 से 20 दिनों का होता है और प्रायः यह मध्य मार्च से अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक खिले रहते हैं।

 क्योंकि शुरुआत में ही पहुँच गये थे, अतः हमने ट्यूलिप उत्सवका पूरा आनंद उठाया ।  इस दौरान हमें स्थानीय हस्तशिल्प की एक विस्तृत शृंखला देखने को मिली जिसमें से हमने अपने पसंद के अनुसार खरीदारी की। इसके अतिरिक्त स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किये गए लोक नृत्य और लोक संगीत ने हमें आनंद विभोर कर दिया । हमने यहाँ परोसे जाने वाले स्थानीय पकवान का भी लुफ्त उठाया जिसका स्वाद हमेशा याद रहेगा।

 इसके बाद हम अपने होटल के कमरे में आ गए परन्तु गार्डन का दृश्य अभी भी आँखों के सामने था। हमने निश्चय किया की कल फिर इस गार्डन में जायेंगे और इसकी खुबसूरती का आनंद लेंगे ।  योजना के अनुसार हम दुबारा वहां पहुँच गए। हम यहाँ बने रेस्टोरेंट में बैठकर चाय की चुस्कियों के साथ यहाँ की सुन्दरता को आँखों में बसाते जा रहे थे।  हमारा वहां से हटने का मन नहीं कर रहा था, परन्तु वापस आना भी जरुरी था। अतः इस मनमोहक दृश्य को आँखों में बसाए हम वापस आ गए।  

 

यह दृश्य कई दिनों तक हमारे आँखों के सामने घुमता रहा। यह एक ऐसा अविस्मरणीय गार्डन हैं जिसकी यादें काफी लंबे समय तक हमारे स्मृति में बनी रहेगी।



(छाया चित्र एवं रचना: सत्य सरोज )

Wednesday, 17 December 2025

चंडीगढ़ वार्षिक गुलदाउदी शो ................ जहां खिल जाएगा आपका चेहरा

 

चंडीगढ़ का प्रसिद्ध तीन दिवसीय गुलदाउदी शो 18 दिसंबर से

 

शिवालिक पहाड़ी की तलहटी में बसा मनमोहक शहर चंडीगढ़,  दिल्ली  और आस पास वालों के लिए लॉन्ग ड्राइव का सबब है। एक फ्रांसीसी वास्तुविद् द्वारा डिजाइन किए गए इस शहर को ढेर सारे उद्यानों के कारण सिटी ऑफ गार्डन्स भी कहा जाता है। यहां एक
से एक सुंदर बगीचे हैं
, जहां सालभर रौनक देखी जा सकती है।

 

ऐसा ही एक गार्डन है टैरेस गार्डन, 'जो सेक्टर 33 के मध्य में स्थित है। लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में फैले इस गार्डन में प्रत्येक वर्ष दिसम्बर के दूसरे सप्ताह में गुलदाउदी शो का आयोजन किया जाता है।

 


नगर निगम चंडीगढ़ द्वारा इस वर्ष आज से 38 वां वार्षिक गुलदाउदी शो का आयोजन किया जा रहा है। 19 से 21  दिसम्बर 2025 तक चलने वाले इस शो के दौरान गुलदाउदी फूल की 270 प्रजातियों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

 

आकार में गुलाब से भी छोटे और डहलिया से भी बड़े तथा अनेक रंग- डिजाइनों के गुलदाउदी के फूलों को यहां एक साथ देखा जा सकता है। इस शो में भाग लेने के लिए सरकारी, अर्धसरकारी तथा शौकिया लोगों को उनकी नर्सरी के फूलों के साथ आमंत्रित किया जाता है तथा उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कृत भी किया जाता है। इस गुलदाउदी शो को देखने के लिए दुनियाभर से पर्यटक और गुलदाउदी प्रेमी आते हैं। इस शो के दौरान तीनों दिन तरह-तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा फूलों से संबंधित प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया जाता है।

तो आइये इसका आनंद उठाते हैं ....

 

 






 Article and Photo: Satya Saroj. 

How to prepare for Board Examination. (1) परीक्षा की तैयारी।




How to prepare for Board Examination. (1) 

बोर्ड परीक्षा की तैयारी योजना अभी से बनाएं


दीपावली के त्यौहार के का उत्साह अभी खत्म भी नहीं हुआ था की परीक्षा की तारीख घोषित  हो गई और उसमें शामिल हो रहे छात्रों व उनके अभिभावकों को एक अनचाहे डर’ ने घेर लिया  है।  छात्र व अभिभावक परेशान होने लगे हैंजो ठीक नहीं है।  ऐसे समय में क्या करें क्या नहींबेहतर परिणाम के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए , आइए जानते हैं ।
****************************** 
आज की बढ़ती गला काट प्रतियोगिता ने बच्चों से ज्यादा उनके अभिभावकों को चिन्ता में डाल दिया है। कोई भी माता-पिता यह नहीं चाहता कि उसका बच्चा परीक्षा में फेल हो या कम नंबर प्राप्त करें। अभिभावक की यह मानसिकता होती है कि जो काम वे खुद नहीं कर सकेवह उनका बच्चा करे। वे अपने बच्चों से काफी ज्यादा अपेक्षा रखते है। कई बार तो अभिभावक इसे अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लेते है।

अभिभावक की तरफ से बच्चों को बात-बात पर रोक-टोक किया जाता है। टीवी मत देखोदोस्तों से बात मत करोखेलना बन्द करो आदि दबाव डाला जाता है। दूसरे बच्चों से उनकी तुलना भी की जाती है जो ऐसा कोई भी अतिरिक्त काम नहीं करते और सारा दिन पढ़ाई में लगे रहते हैं। इस प्रकार के अनावश्यक दबाव के कारण बच्चे तनाव से ग्रसित हो जाते हैं। उनके अंदर यह डर घर कर जाता है कि अगर वे फेल हो गए या उम्मीद से कम नम्बर आए तो क्या होगाउन्हें अपने अभिभावक से अपमानित होना पड़ेगा अथवा अच्छे कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल पाएगा आदि जैसी चिंताएं घर कर जाती हैं। इसके आलावा परीक्षा को लेकर कई अन्य शंकाएं जैसे अगर पेपर कठिन हुआ तो क्या करुंगाअगर पढ़ा हुआ याद नहीं रहा तो क्या करुंगा आदि भी सताती रहती है। 

इस प्रकार बच्चा मानसिक और भावनात्मक दबाव का शिकार हो जाता हैजिसका प्रभाव उसके प्रदर्शन पर साफ दिखता है। परिणामस्वरूप उसका रिजल्ट उम्मीद से भी काफी खराब हो जाता है।
कई परिवारों में घर के सदस्यों के बीच छोटी-छोटी बातों पर भी झगड़ा होता रहता है। इससे घर का माहौल तनावपूर्ण बन जाता हैजिसका असर घर के बच्चों पर भी पड़ता है। अत: अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कम से कम परीक्षा के दिनों में घर के आपसी झगड़ों से दूर रहे। शांति का माहौल कायम करें तथा बच्चें के साथ प्यार पूर्वक पेश आएं।

हार-जीत तो चलती ही रहती है। यह जरूरी नहीं है कि सभी बच्चे 95 या 98 नंबर ही प्राप्त करे। परीक्षा का परिणाम बच्चों के मानसिक एवं पारिवारिक स्थिति से भी प्रभावित होता है। यदि परिवार में किसी प्रकार की समस्या है तो इससे सकारात्मक तरीके से निपटने की कोशिश करनी चाहिए।
परीक्षा परिणाम खराब हो जाने से जिंदगी नहीं रूकती। दुबारा प्रयास करना चाहिए और हो सकता है परिणाम अच्छा हो। हताश हो जाना इसका निवारण नहीं है। परीक्षा के डर एवं खराब परिणाम से हताश हो कर कई बच्चें अपनी जान गवां देते हैंजो अत्यधिक अपेक्षाओं का परिणाम है।

छात्रों को चाहिए कि सकारात्मक सोच के साथ एक निश्चित रूटीन पर अमल करते हुए अपनी तैयारी पूरी तनमयता के साथ करें। परिवार में छोटी-मोटी समस्याएं आती रहती हैंजिसका निदान घर के बड़ों को करना है और बच्चों को इससे दूर रह कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। अगर घर की किसी गतिविधि से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है तो उन्हें इस बारे में अपने अभिभावक से बात करनी चाहिए। 
परीक्षा के दौरान प्रकृति के जितना करीब रहें,उतना ही अच्छा है। सुबह जल्दी उठकर सैर करना चाहिए तथा रात को सोने से पहले भी थोड़ी देर खुली हवा में टहलना चाहिए। कुछ देर योग करना मानसिक शांति के लिए बहुत जरूरी है। हरी सब्जीसागफल एवं अन्य प्राकृतिक पदार्थ भोजन में शामिल करने से बीमारियां दूर रहती है और दिमागी तनाव भी नहीं होता। 

बच्चों को चाहिए कि वह कुछ दिनों के लिए अनावश्यक कामों को छोड़ कर रूटीन के अनुसार पढ़ाई करें। पूर्व में पढ़ी गई सामग्रियों  को दोबारा रिवाइज करें तथा कठिन प्रश्नों को बार-बार पढ़ते रहें। महत्वपूर्ण चार्टफार्मूलाडायग्राममैप आदि को अपने स्टडी रूम में दीवार पर टांग देंताकि बार-बार देखते रहने से वह हमेशा आपके जेहन में रहे। यादि आप एकाग्रता के साथ पढ़ाई करते हुए इन छोटी-छोटी बातों पर अमल करते हैं तो सफलता निश्चय ही आपके कदम चूमेगी।


*************************************************
https://www.blogger.com/blog/post/edit/7649825435783466067/407394901003288946

अभिभावक क्या करें,और  क्या नहीं,  छात्रों के लिए आवश्यक सुझाव तथा परीक्षा हाल में  क्या करें, जानने के लिए अगले अंक का  इंतजार करें।
https://www.blogger.com/blog/post/edit/7649825435783466067/407394901003288946

Sunday, 26 January 2025


मन की परिभाषा
*************
मन की ...क्या मैं दूँ परिभाषा

कभी ये है आशा.. कभी है  निराशा...
मन की ...क्या मैं दूँ परिभाषा...

 

कभी ये आसमान को छूने,

पंछी बन उड़ जाए ...

इस पल यहाँ तो,  उस पल वहाँ,
वश में किसी के न आये,

चाहे तो ये, कुछ भी कर जाए ,

रहे गतिशील ये हमेशा...

मन की ...क्या मैं दूँ परिभाषा

कभी ये है आशा.. कभी है  निराशा...


यादों को ये रखता संभाले
बेमतलब में उछाले..
रातों को हमें ये जगाता
सपनों को पूरा कर जाता
पुरे न हो सपने कभी तो ...

देता है ये हमको दिलाशा ...

मन की ...क्या मैं दूँ परिभाषा

कभी ये है आशा.. कभी है निराशा...

मन तो है जैसे समंदर 

सुख- दुख सब इसके अंदर 

रंगीन सपने है बुनता  

ये नहीं किसी की भी सुनता,  

पूरी करता है सबकी ये आशा,  

नहीं इसकी है कोई भी भाषा...  

मन की ...क्या मैं दूँ परिभाषा   

कभी ये है आशा.. कभी है  निराशा...


मन की ...क्या मैं दूँ परिभाषा  

कभी ये है आशा.. कभी है  निराशा...



Sunday, 8 December 2024

मोबाइल फास्ट Mobile Fast

 

व्यंग:    मोबाइल फ़ास्ट 


यदि आप मोबाइल का ज्यादा प्रयोग करते हैं और इसके बिना नहीं रह सकते हैं तो यह आपके स्वास्थ के साथ साथ आपके सामाजिक और आर्थिक जीवन को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। आइये जानते हैं कि मोबाइल का प्रयोग करते हुए भी हम अपने सामाजिक जीवन में कैसे मजबूत बने रहें और आर्थिक उन्नति करें । 

आज मैं आपको एक ऐसे व्रत के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसका पालन करने से मोबाइल बाबा भी खुश रहते हैं और हम भी खुश रहते हैं। मोबाइल बाबा को खुश रखने के साथ अच्छी सेहत प्राप्त करने के लिए यह व्रत जरूरी है।

इसके लिए आपको सप्ताह में मात्र एक दिन मोबाइल फास्ट रखना है। यह दिन रविवार हो तो बेहतर है। इसके अलावा किसी अन्य दिन भी मोबाइल फास्ट रखा जा सकता है।


फ़ास्ट रखने से पहले ( Prior to fast/ पारण ):  

फ़ास्ट से एक दिन पूर्व, अर्थात् शनिवार की संध्या को मोबाइल से अनावश्यक डाटा, वीडियो, फोटो आदि डिलिट कर दे ताकि मोबाइल बाबा अपने आप को हल्का महसूस करे। इसके बाद मोबाइल को आधुनिक गंगा जल (मोबाइल साफ करने के लिए बना हुआ स्प्रे ) से अच्छी तरह साफ कर इसे स्विच ऑफ कर के सुरक्षित स्थान पर रख दें।


फ़ास्ट वाले दिन (on the day of fast) :  

व्रत वाले दिन यानि रविवार सुबह उठने के बाद मोबइल बाबा के दर्शन करें और प्रणाम करने के बाद मन में व्रत लें कि आज आप “मोबाइल फास्ट” जैसा महान काम करने जा रहे हैं और इसे सफल बनाने में मोबाइल बाबा आपको शक्ति प्रदान करें।


तत्पश्चात् आप नित्यक्रिया से निवृत हो कर और स्नान आदि करने के बाद अपने स्टडी टेबल/ ड्रेसिंग टेबल आदि के पास मोबाइल को बन्द करके रख दें और एक अगरबत्ती जलाकर एक मिनट के लिए आरती करने के बाद अगरबती को अपने घर के गमले में लगे किसी भी प्लांट के साथ या किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर स्थापित कर दें।


प्रसाद के रूप में आप घर में सुबह बनने वाले नास्ते को मोबाइल बाबा को अर्पित करने के बाद सुबह का नाश्ता करें। ध्यान रहे कि पूरे दिन आपको मोबाइल का सेवन अर्थात उसे प्रयोग नहीं करना है, अन्यथा आपका  मोबाइल फास्ट भंग हो जाएगा और आपका व्रत टूट जाएगा, जो आपकी सामाजिक, आर्थिक स्थिति और सेहत के लिए नुकसान दायक हो सकता है।


व्रत के दौरान निम्न काम करने से मोबाइल बाबा प्रसन्न होते हैं और आर्थिक-सामाजिक उन्नति प्रदान कराते है । :


सुबह का नास्ता पूरे परिवार के साथ करें । नास्ते में सात्विक भोजन जैसे फल, रोटी, खीर आदि का सेवन करें। खाना आरंभ करने से पहले परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे का अभिनंदन करें और सकारात्मक बातें करें। आप इस समय पूरे दिन में किए जाने वाले कार्य की रूप रेखा भी तैयार कर सकते हैं। आपके इस व्रत को सफल बनाने के लिए आप मोबाइल बाबा से मोबाइल प्रयोग न करने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना जरूर करें। ( हे मोबाइल बाबा, मुझे इतनी शक्ति दें कि मैं आपका प्रयोग किये बिना आज अपने कर्तव्यों का पालन कर सकूँ।) 


इस दिन का उपयोग आप कुछ नया लिखने के लिए कर सकते हैं। फेसबुक को छोड़ कर आप किसी मित्र/ सहेली या रिस्तेदार से मिलने जा सकते हैं जिससे मिले हुए काफी  दिन हो गए हों।

जब आप अपने पुराने मित्रों और रिस्तेदारों से मिलेंगे, तो आपको पुरानी बातें याद कर के जोर की हंसी आएगी, जो आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है।

वीडियो गेम खेलने के बजाये आप इस समय का उपयोग अपने मन पसंद इनडोर या आउटडोर खेल खेलने में कर सकते हैं, जिसे आप अपने  व्यस्त समय में नहीं कर पा रहे थे। इससे आप काफी हल्का महसूस करेंगे।

दिन में आपको कई ऐसे दृश्य दिखेंगे, जिसका फोटो खींचने का दिल करेगा। आपके पास मोबाइल नहीं हैं, अतः आप इसका फोटो खींचने के बजाए उसे मन के कैनवास में कैद कर लिजिए और उस पल  का असली आनंद लीजिये। सूर्योदय और सूर्यास्त तथा रात में चाँद की चाँदनी को देखते हुए आपको अद्भुत आनंद की अनुभूति होगी। इसे अनुभव कीजिए।

इस फ़ास्ट के दौरान मोबाइल से दूर होने के कारण हो सकता है आपके अन्दर चिड़चिड़ापन उत्पन्न हो, ऐसे में आपको थोड़ा धैर्य रखते हुए अपने मोबाइल फास्ट की तरफ ध्यान लगाना है। 

आपको ऑनलाइन शॉपिंग की आदत है।  कोई बात नहीं, आज आप नजदीकी बाजार जाएँ और शॉपिंग करें।  आपको जरूर कुछ नया दिखेगा।  साथ ही बाजार में आपको कुछ जाने पहचाने चेहरे भी दिखेंगे, जो कभी आपके सुख- दुःख के साथी थे।  उनका हाल खबर पूछें, आपको अच्छा अनुभव होगा।   

हो सकता है आपको मोबाइल पर फिल्म देखने की आदत हो, तो आज आप थिएटर में फिल्म देखने जाईये ।  किसी मित्र के साथ या अकेले भी जा सकते हैं।  यकीन मानिये, लोगों के साथ फिल्म देखने में आपको ज्यादा मजा आयेगा और आपका मोबाइल फास्ट भी नहीं टूटेगा।  

रात होते-होते आप यह अनुभव करेंगे कि मोबाइल का प्रयोग नहीं करने से और सोशल मीडिया के उपर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराने से आपकी जिंदगी पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा है। हाँ,  इसके अच्छे प्रभाव से आप लाभान्वित जरूर हुए हैं, जो आपको आने वाले समय में दिखेगा।

रात को सोने से पहले आपको सोशल मिडिया देखने की आदत है और इसका प्रयोग नहीं करने के कारण आपको नींद नहीं आ रही है। तो कोई बात नहीं। आपके घर में जो भी किताब उपलब्ध है, उसमें से एक कहानी पढ़ना शुरू कर दीजिये। अगर कहानी की किताब नहीं है, तो बच्चों की किताब में से भी कोई कहानी पढ़ सकते हैं। इससे आपको जल्दी नींद आ जाएगी और कुछ नए शब्द और विचार भी सीखने को मिलेंगे।


किताब पढ़ते समय आपको अपना दिमाग चलाने का अवसर मिलता है और दिमाग की एक्सरसाइज होती है। यह “अल्जाइमर” जैसी बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है और हमारी स्मरण शक्ति बढ़ती है जबकि सोशल मिडिया के प्रयोग से हमारे दिमाग में 'नाकारात्मक शक्ति’ घर कर लेती है।

जब अगली सुबह आप उठेंगे, तो आप खुद को पहले से ज्यादा तरोताजा महसूस करेंगे।

आज सोमवार है और आपको मोबाइल फास्ट नहीं रखना हैं, किन्तु अगर कल के फास्ट से आपको थोड़ा भी फायदा हुआ है, तो आज आप मोबाइल का कम प्रयोग करें, जो आपके फास्ट को ताकत प्रादान करेगा । 

इस व्रत का आप मात्र एक महीने तक पालन करके देखिये, आप अपने अन्दर के किसी भी प्रकार के डिप्रेशन और एंग्जायटी को समाप्त कर सकते हैं।


पहले महीने आप यह व्रत सिर्फ रविवार को ही रखें।  अगर आपको थोड़ा भी लाभ होता हुआ दिख रहा है, तो आप व्रत को अन्य दिनों में भी कुछ घंटों के लिए कर सकते हैं।


फिर एक दिन ऐसा आएगा, जब मोबाइल आपका गुलाम होगा न कि आप मोबाइल के गुलाम। 


सावधानी :  यदि इस व्रत के दौरान कभी भी आपको लगता है कि आपके लिए यह काफी कठिन काम है, तो आपको पहले अपने मन को नियंत्रित (वार्मअप ) करने की ज़रूरत है। आप इसकी शुरुआत कुछ घंटों के लिए भी कर सकते हैं । जैसे कि आप खाने के समय इसका प्रयोग न करें , आप इसका नोटिफिकेशन और रिंगटोन बंद करके रखें , एक जगह बैठे रहने के बाजाए आप बीच-बीच में अपनी सीट से उठ कर टहल लें , टीवी या रेडियो पर गानें सुनें आदि।


इस व्रत का नियमित पालन करने से आप की सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी, आर्थिक लाभ होगा और सेहत में सुधार होगा ऐसा, खुद मोबाइल बाबा का कहना है। यकीन न हो, तो गूगल से पूछ लें, लेकिन कंप्यूटर के माध्यम से।



सत्य सरोज

Saturday, 30 November 2024

फेसबुक फ्रेंड

 

फेसबुक फ्रेंड

मैं अपना फेसबुक अकाउंट रोज चेक करती हूँ । इसके लिए मै प्राय: अपने लैपटॉप का प्रयोग करती हूँ तथा यदा-कदा मोबाइल के माध्यम से भी फेसबुक चेक कर लेती हूँ। पिछले तीन-चार दिनों से अधिक व्यस्तता के कारण मुझे लैपटॉप ऑन करने का मौका नहीं मिला तथा मोबाइल में कुछ तकनीकी समस्या होने के कारण मैं उसका भी प्रयोग नहीं कर पाई। 
कल रविवार की छुट्टी है और काम का दबाव भी नहीं है। यह सोच कर ऑफिस से आते ही मैंने अपना फेसबुक पेज ओपन किया और दोस्तों के पोस्ट देखने बैठ गई। दो तीन दोस्तों के पोस्ट देखते और लाइक करते हुए मैं आगे बढ़ती चली गई। अगला मैसेज रिया का था, जिसे अभी कुछ मिनट पहले ही पोस्ट किया गया था। इसे पढ़कर मैं सन्न रह गई। हमेशा खुश रहने वाली तथा व्यंगात्मक मैसेज भेजने वाली रिया का मैसेज आज आशा के विपरित था। “लोगों ने मुझे रिजेक्ट किया, आज मैं सबको रिजेक्ट करती  हूँ। गुड बाई !”  इसके साथ एक फोटो भी पोस्ट किया गया था, जिसे देख कर मैंने तुरंत उसे ऑनलाइन ढूँढना शुरू कर दिया। अपनी आदत के अनुसार वह ऑनलाइन चैट के लिए उपलब्ध थी। मैंने चैटिंग शुरू कर दी।
लुधियाना में रहने वाली रिया की पिछले महीने ही एक एन.आर.आई. लड़के परविंदर से सगाई हुई थी। वह बहुत खुश थी। सगाई में शामिल होने के लिए मेरे पास भी निमंत्रण पत्र आया था, किन्तु व्यस्तता के कारण मैं कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाई। अगले महीने की दस तारीख को उसकी शादी होने वाली थी और वह हमेशा के लिए कनाडा शिफ्ट होने वाली थी, किन्तु इसी बीच पता चला की परविंदर ने कनाडा की एक स्थानीय लड़की से शादी कर ली है। यह खबर सुन कर वह बिल्कुल टूट गई। उसके सारे सपने कांच की तरह बिखर गए। वह बिल्कुल अकेली हो गई। इस मुश्किल घड़ी में उसे सहारा देने वाला कोई नहीं था। उसके मम्मी-पापा भी पिछले चार-पांच दिनों से कहीं बाहर गए थे और वह अपना गम फेसबुक के माध्यम से दोस्तों से शेयर कर रही थी। किन्तु उसे कहीं से भी भावनात्मक सपोर्ट नहीं मिल पा रहा था। इस कारण वह जीवन से निराश हो चुकी थी और इस दुनिया में नहीं रहना चाहती थी। चैटिंग के दौरान मैंने महसूस किया कि उसे मोरल सपोर्ट की सख्त जरूरत है, वरना वह बिल्कुल ही टूट जाएगी।
मैंने टैक्सी बुलाई और लैपटॉप पर चैटिंग करते हुए रिया के घर की तरफ रवाना हो गई। चंडीगढ़ से लुधियाना तक के दो घंटे के सफर के दौरान मैंने लगातार चैटिंग करते हुए उसे व्यस्त रखा।
मैं उसके दरवाजे के बाहर खड़ी थी। रिया को शायद दरवाजा बंद करने का भी होश नहीं रहा। हल्के धक्के से ही दरवाजा खुल गया। मैं रिया को ढूंढ़ते हुए उसके बेडरूम में पहुंच गई। वह लैपटॉप पर मुझसे चैटिंग में व्यस्त थी, किन्तु कमरे का नजारा सब कुछ बयान कर रहा था। दुपट्टे से बना हुया फांसी का फंदा पंखे से लटक रहा था तथा बेड पर प्लास्टिक का एक छोटा-सा स्टूल रखा हुआ था। मुझसे चैटिंग शुरू करने से पहले वह सुसाइट करने की पूरी तैयारी कर चुकी थी। मुझे देखते ही वह मुझ से लिपट गई और फूट-फूट कर रोने लगी। कहते है कि आंसू के माध्यम से हमारे सारे दर्द पानी बन कर निकल जाते हैं। रिया के दर्द भी आंसुओं के माध्यम से निकलते जा रहे थे।
मैंने अपने दोस्त को मौत के मुंह से निकाला था। किसी के लिए कुछ अच्छा करने पर कितना शुकून मिलता है, उसका एहसास पा कर मैं आनंदित हो रही थी। रिया के दर्द के आंसुओं के साथ मेरे खुशी के आंसू मिश्रित हो रहे थे।

Tuesday, 5 November 2024

आस्था का महा पर्व – छठ

 

आस्था का महा पर्व – छठ


.         





आस्था का महापर्व "छठ पूजा" की शुरुआत हो चुकी है। 

छठ लोकपर्व मुख्य रूप से  बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। यह कार्तिक शुक्ल की षष्ठी एवं सप्तमी को मनाया जाता है। सूर्य षष्ठी व्रत होनेके कारण इसे छठ कहा गया है। 
 इस क्षेत्र के प्रवासियों द्वारा यह पर्व देश - विदेश के अन्य क्षेत्रों मे भी उल्लासपूर्वक मनाया जाता है। पारिवारिक सुख-स्मृद्धि तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व स्त्री और पुरुष समान रूप से मनाते हैं।

क्यों मनाते हैं छठ पर्व

छठ व्रतके संबंधमें अनेक कथाएं प्रचलित हैं।  कहा जाता है की कि साधु की हत्या का प्रायश्चित करने के लिए जब महाराज पांडु अपनी दोनों पत्नियों के साथ वन में दिन गुजार रहे थे, उन्हीं दिनों महारानी कुंती ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से सरस्वती नदी में सूर्य की पूजा की थी। इससे कुंती पुत्रवती हुई। इसलिए संतान प्राप्ति के लिए छठ पर्व का बड़ा महत्व है। धीरे धीरे यह प्रचलन में आ गया।


एक अन्य मान्यता के अनुसार ऐसा माना जाता है की महाभारत का एक प्रमुख पात्र कर्ण, तात्कालिन अंग देश यानी आज के भागलपुर (बिहार) का राजा था।  वह नियम पूर्वक कमर तक पानी में जाकर सूर्य देव की आराधना करता था और उस समय जरुरतमंदों को दान भी देता था। कार्तिक शुक्ल षष्ठी और सप्तमी के दिन कर्ण, सूर्य देव की विशेष पूजा किया करता था।  अपने राजा की सूर्य भक्ति से प्रभावित होकर अंग देश के निवासी सूर्य देव की पूजा करने लगे। धीरे-धीरे सूर्य पूजा का विस्तार पूरे बिहार और पूर्वांचल क्षेत्र तक हो गया।

सामाजिक मान्यता

चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में शुद्धता का विशेष महत्व है।  इसे बहुत ही सादगी और पवित्रता से मनाया जाता है। इसमें बाँस से बने सूप एवं टोकरियों तथा मिट्टी के बर्तनों का ही प्रयोग किया जाता है। पर्व शुरू होने से पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई की जाती है। फिर पूजा के लिए प्रयोग होने वाली सभी सामग्रियों को बाजार से लाने के बाद अच्छी तरह धो कर ही रखा जाता है। पूजन सामग्री बेचने वाले दूकानदार भी शुद्धता का विशेष ध्यान रखते है। यह त्योहार सामूहिक रूप से लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करता है।


                                                                       यह जन सामान्य द्वारा अपने रीति-रिवाजों के रंगों में गढ़ी गई पूजा पद्धति है। इसके केंद्र में किसान और ग्रामीण जीवन है।  इस व्रत के लिए किसी पंडित या गुरु की जरूरत नहीं पड़ती है। इस उत्सव के लिए जनता स्वयं अपने सामूहिक अभियान संगठित करती है। सामूहिक रूप से नगरों की सफाइ, व्रतियों के गुजरने वाले रास्तों का प्रबंधन, तालाव या नदी किनारे अर्घ्य दान की उपयुक्त व्यवस्था आदि की जाती है । इस उत्सव में आरंभ से अंत तक समाज की अनिवार्य उपस्थिति बनी रहती है। यह सामान्य और गरीब जनता के अपने दैनिक जीवन की मुश्किलों को भुलाकर सेवा भाव और भक्ति भाव से किए गए सामूहिक कर्म का विराट और भव्य प्रदर्शन है।

व्रत का आरंभ

चार दिवसीय यह त्योहार कार्तिक शुक्ल चतुर्थी “ नहाय खाय” से आरंभ होता है।   व्रती शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं।  दूसरे दिन को ‘खरना’ कहा जाता है । इस दिन व्रतधारी दिनभर का उपवास रखने के बाद शाम को गुड से बने हुए चावल की खीर एवं रोटी छठी मैया को प्रसादके रूप में अर्पित करते हैं और व्रती इसी प्रसाद को खाते है एवं अन्य लोगों को बांटा जाता है। इसके बाद अगले दो दिन तक व्रती कूछ नहीं खाते  हैं।




तीसरे दिन अर्थात कार्तिक शुक्ल षष्ठी को दिन में छठ का प्रसाद बनाया जाता है। प्रसाद के रूप में शुद्ध देशी घी एवं आंटे का ठेकुआ, चावल के आंटे का  लड्डू, आदि बनाए जाते हैं।  इसके अलावा कई प्रकार के मौसमी फल, गन्ना, नारियल, केला आदि भी प्रसाद के रूप में शामिल होता है। शाम को पूरी तैयारी कर बाँस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है और व्रती के साथ परिवार तथा पड़ोस के सारे लोग अस्त होते हुये सूर्य को अर्घ्य देने घाट की ओर चल पड़ते हैं। सभी छठव्रती एक नीयत तालाब या नदी किनारे इकट्ठा हो, पानी में खड़े हो कर सामूहिक रूप से अर्घ्य देते हैं । इस दौरान कुछ घंटे के लिए मेले जैसा दृश्य बन जाता है।


चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह को व्रती पुनः वहीं इक्ट्ठा होते हैं जहाँ उन्होंने शाम को अर्घ्य दिया था। सुबह में उगते हुये सूर्य को अर्घ्य के साथ जल और दूध भी अर्पण किया जाता है। अंत में व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करते हैं। इसके बाद प्रसाद वितरित किया जाता है।

इस व्रत में नए चावल और गुड़ का खीर बनाने की परंपरा है।  गुड़ को चीनी से शुद्घ माना गया है। यही कारण है कि छठ पर्व में चीनी की बजाय गुड़ की खीर बनाई जाती है। इसका एक वैज्ञानिक कारण भी हैं। गुड़ की तासीर गर्म होती है और यह सुपाच्य होता है। गुड़ का सेवन व्रती को आंतरिक उर्जा प्रदान करता है जिससे इस लंबे व्रत को पूरा करने का बल मिलता है।

यह प्रायः महिलाओं द्वारा किया जाता है किंतु कुछ पुरुष भी यह व्रत रखते हैं। ‘शुरू करने के बाद छठ पर्व को सालोंसाल तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित महिला को न सौंप दें । घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि छठ पर्व करने वाली महिलाओं को संतान की प्राप्ति होती है और घर मे सुख समृद्धि आती है।
                   
*********************
लेख एवं फोटो - सत्य सरोज
            **********