Wednesday, 6 February 2019




आया वसंत
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फूलों पर भँवरे मंडराये,
हवा लगी बहने स्वछंद,
कलियाँ महक बिखेर रही,
है मौसम आया वसंत।


रंग विरंगे फूल खिलें हैं,
करता आँखों को मदमस्त,
                  हवा में खुशबू बिखर गई,                   
मदहोश मन को करे वसंत।


मुरझा गए थे जो पौधे,
ठंढ की शीतल छाया से,
उन पर भी छाई हरियाली,
यौवन ले कर आया वसंत।

अब तक जो थे छुपे हुये,
सर्द मौसम की आड़ में,
घूँघट उनके मुखड़े से,
हटाने को आया वसंत।


तराने नए सुनाने को,
मन मस्ताना बनाए वसंत,
देखी नहीं जो माशूमियत,
चेहरे पे उनके लाया वसंत।

लंबी प्रतीक्षा का हुआ अंत,
आशा की किरण लाया वसंत।
ये अंत है यारों पतझड़ का,
रंगों की बारात लाया वसंत।
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Thursday, 17 January 2019





पार्क में महिला मंडली
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शर्दी का मौसम है देखो,
गुनगुनी है धूप खिली,
महिला मंडली जमी हुई है,
गप्पों की बरसात हुई।

रोके नहीं रुकते ठहाके,
खुलकर जीने की बात चली,
काम की कोई चिंता नहीं,
एंजॉयमेंट की बस बात हुई।

यादगार किस्से सुनाने की,
सब में है बस होड़ लगी,
टेस्टी डिसेज की चर्चा यहाँ,
रेसिपी सेयर की बात हुई ।

पुराने गाने गुनगुना कर ,
मजा ले रहे अंताक्षरी का,
हाउजी खेलते हुये फिरसे,
बचपन की भी बात हुई।

जब पेट में चूहे लगे दौड़ने, 
मंडली समाप्ती की ओर चली,
घर से खाना लाये थे सब,
मिल- बाँट, खाने की बात हुई।

जय हो महिला मंडली......












सत्य सरोज