Saturday, 25 June 2022

कुत्ते की मौत


जेठ की तपती दोपहरी, ऊँची – ऊँची इमारतें, चौड़ी सड़कें, फूटपाथ और सब के सब कंक्रीट के।  हरियाली का कहीं नमो निशान नहीं।  पानी के स्रोत की तो बात की छोडिये।   कंक्रीट के इस जंगल रूपी शहर में ऊँची – ऊँची इमारतों के बीच  मानो इंसानों की तरह और ऊपर उठने की होड़ सी लगी हो।   

सूरज की तपिश से सारा का सारा शहर जलता हुआ सा लग रहा है, मानो सूर्यदेव अपनी तेज किरणों से पानी की हर एक बूंद निगल गए हों।  इसी गर्मी में, इन्हीं तपती सड़कों पर भागती हजारों गाड़ियाँ जैसे आग में घी डाल रही हों।   ऐसे में इंसान तो सक्षम है अपनी प्यास बुझाने के लिए किन्तु एक निरीह जानवर को अपनी प्यास बुझाने के लिए इन व्यस्त सड़कों पर भटकना उसकी मजबूरी है ।  

पानी की तलाश में इधर-उधर दौड़ते –भागते एक कुत्ता काफी थक गया है, तभी उसकी नजर नजदीक के चौराहे पर हरी बत्ती का इन्तजार कर रहे एक पानी के टैंकर से बूंद –बूंद टपक रहे पानी पर पड़ती है।

उसके अन्दर अपनी प्यास बुझाने की एक आशा जगती है और उस पानी को पाने की उम्मीद में वह पूरी ताकत से उस टैंकर की तरफ दौड़ता है।  वह कुत्ता अभी उस टैंकर के पास पहुँचने ही वाला था की लाइट ग्रीन हो गई और वह  टैंकर अपने गंतव्य की ओर दौड़ने लगा।   कुत्तें ने अभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी थी। वह  पुनः उस टैंकर के पीछे अपनी पूरी ताकत से साथ दौड़ने लगा।  उसे विशवास था की वह  टैंकर दुबारा कहीं रुकेगा और वह अपनी प्यास बुझा पायेगा।   

उस कुत्ते के साथ – साथ इस व्यस्त सड़क पर हजारों गाड़िया भी दौड़ रही है जो इस कुत्ते के सड़क पर आ जाने से परेशान है और हॉर्न बजाये जा रहे है।   

अंततः वह कुत्ता टैंकर के बिल्कुल पास पहुँच जाता है और टैंकर के ढक्कन से गिर रहे बूंद –बूंद पानी को लपकने की कोशिश में लग जाता है।  सड़क पर दौर रही गाड़ियों के ड्राइवर द्वारा इस कुत्ते को बचाने की कोशिश में टैंकर तथा अन्य कई गाड़िया आपस में टकरा जाती है।  टैंकर अपना संतुलन खोकर पलट जाता है और वह कुत्ता उसके नीचे दब जाता है।  टैंकर का पानी सड़क पर चारों तरफ फ़ैल जाता है।  

पानी का स्पर्श पा कर तपती हुई सड़क भभक उठी और एक सौंधी सी खुशबू वातावरण में फ़ैल गई।  इसे सूंघते हुए आस पास के सुछ और जानवर वहां पहुँच गए और अपनी प्यास बुझाने लगे।  

दुर्घटना  की जानकारी पाते ही पुलिस एवं वचाव दल वहां पहुँच गये और अपने –अपने काम में लग गए, परन्तु उस कुत्ते की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया जो इतनी कोशिश के बावजूद भी प्यासा ही मर गया था  ।



सड़क पर दौर रही उन हजारों गाड़ियों में से एक गाडी में बैठा मैं यह सब देख पर काफी व्यथित हो गया और उस पल की कल्पना में डूब गया जब संसाधनों के अभाव में इस कुत्ते की तरह इंसान भी कुत्ते की मौत मरने को मजबूर होगा।  

(काल्पनिक कथा) 

satyasaroj01@gmail.com

Friday, 17 June 2022

HAPPY FATHER'S DAY

हमारे पूरे जीवन में अनेक लोगों का योगदान होता है। लेकिन हमें अपने पैरों पर खड़ा करने में जिसका सबसे ज्यादा योगदान होता है उसे हम आसानी से भुला देते हैं। सही –गलत की पहचान कराने वाला, हमेशा हमारे हित में काम करने वाला एवं एक मार्गदर्शक का रोल अदा करने वाले पिता को समर्पित है मेरी यह कविता:

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वो हैं मेरे पिता































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उंगली पकड़ के चलना सिखाया जिसने,  
बचपन में घोड़ा बनके घुमाया जिसने
कंधे पे बिठा के मेला दिखाया जिसने,
गलती पर भी दिल से लगाया जिसने
वो हैं मेरे पिता…., वो हैं मेरे पिता


  

कहानी सुना के सुलाया है जिसने,
अनुशासन में रहना सिखाया जिसने,
ख़्वाबों को पूरा करना सिखाया जिसने,
बुरी संगतों से मुझको बचाया जिसने,
 वो हैं मेरे पिता…., वो हैं मेरे पिता 
  

भूल कर भी मुझे नहीं रुलाया जिसने,
सभी सवालों का उत्तर बताया जिसने,
मुसीबतों से लड़ना सिखाया जिसने,
हर पल मेरा साथ निभाया जिसने,
वो हैं मेरे पिता…., वो हैं मेरे पिता

 


 












Sunday, 12 June 2022

आम का आगमन

 

आम का आगमन
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 फलों का राजा आम

  आम के आगे सब फीके ।

 



दोस्तों, बाजार में फलों के राजा आम का आगमन हो चुका है ।  आम के आगमन के बाद (अप्रैल-मई ) अन्य फलों की मांग एकदम से कम हो जाती है और इनमें से कितने तो अपनी किस्मत को कोसने लगते हैं कि मैं भी आम क्यों नहीं हुआ !

 


इसके बाद अगले 3-4 महीने तक अपने अलग अलग रूप और रंग में  आम, जनता का पसंदीदा फल बना रहता है। इस दौरान अन्य फलों की मांग काफी कम हो जाती है ।

 जहाँ देखो आम ही आम दिखाई पड़ता है । लोग प्रतिदिन कई-कई किलो आम खा जाते हैं। आम के प्रभाव के कारण  अन्य फलों के सामने अपनी प्रतिष्ठा बचाने का सवाल पैदा हो जाता है।  कुछ अन्य फल जैसे सेब, केला, पपीता आदि आपने ज्यादा दिन तक  टिकने की खूबी के कारण मंडियों और कुछ घरों में अपनी उपस्थिति बनाए रखने में कामयाब  रहते है, वहीं रसीले फल जैसे नारंगी, मौसंबी,  किन्नू  आदि  'जूस के रूप में अपनी उपस्थिति कायम रखने में कामयाब रहते हैं और तरबूज अपने ठंढे स्वभाव के कारण आम के साथ दौड़ में शामिल रहता है परंतु आम की लोकप्रियता के आगे सभी नतमस्तक रहते हैं ।

 


जैसे ही आम का आगमन होता है, अन्य फलों का चेहरा मुरझा जाता है। कुछ फल तो अपनी उपस्थिति भी  कायम नहीं रख पाते और बिल में छिप  जाते हैं ।

 


 इन सबके बीच सदाबहार फल केला लोगों में  कम मांग  के बाबजूद अपनी उपस्थिति बनाये रखने की कोशिश में कामयाब रहता है। इसके पीछे इसका आंतरिक गुण तथा बच्चों और बुजुर्गों में उसकी मांग का होना है।  बच्चे और बुजुर्ग अपने कमजोर दाँत तथा केला के पौष्टिक  गुणों के कारण इसे खाना बेहतर समझते है। इस दौरान कई छोटे मोटे फल बाजार में आते है और गायब हो जाते हैं परन्तु आम अपने अलग अलग स्वरूप में लगातार लोगों के दिलों पर राज करता रहता है । शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो आम को पसंद नहीं करता हो !  मैंगो शेक के रूप में यह हर गली और चौराहे पर आसानी से और सस्ते दामों पर उपलब्ध होता है । इस प्रकार आम हर अमीर और गरीब इन्सान का पसंदीदा फल बन जाता है ।

 

बदलाव ही प्रकृति का नियम है और कोई भी इस दुनिया में सदा के लिए बना नहीं रह सकता। यही संदेश देते हुए आम भी चला जाता है । सावन समाप्ति के बाद आम का प्रभाव कम होने लगता है और स्वतंत्रता दिवस के बाद अन्य फल अपने राजा के दबदबे से बाहर निकलने लगते है । एक तरफ बाजार में आम का आना काम होने लगता है,  तो दूसरी तरफ इस खाली स्थान को भरने के लिए देश – दुनिया का दूसरा सबसे लोकप्रिय फल 'सेब' सिर उठा कर खड़ा हो जाता।

 

 देखते ही देखते आम का स्थान ‘ सेब’ ले लेता है और अगले 6 महीने तक गद्दी  पर कायम रहता है।  इसके  साथ साथ अन्य सभी फल जैसे नासपाती, बाबूवोसा, अमरूद, अनार आदि भी हमारे मेनू  में शामिल हो जाता है । इसके बाद पुनः आम के आगमन तक ये फल लोगों में अपनी लोकप्रियता कामय रखते हैं  किन्तु आम के आने के बाद पुनः अपना प्रभाव खो देते हैं ।







आलेख और फोटो: सत्य सरोज