Sunday, 8 December 2024

मोबाइल फास्ट Mobile Fast

 

व्यंग:    मोबाइल फ़ास्ट 


यदि आप मोबाइल का ज्यादा प्रयोग करते हैं और इसके बिना नहीं रह सकते हैं तो यह आपके स्वास्थ के साथ साथ आपके सामाजिक और आर्थिक जीवन को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। आइये जानते हैं कि मोबाइल का प्रयोग करते हुए भी हम अपने सामाजिक जीवन में कैसे मजबूत बने रहें और आर्थिक उन्नति करें । 

आज मैं आपको एक ऐसे व्रत के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसका पालन करने से मोबाइल बाबा भी खुश रहते हैं और हम भी खुश रहते हैं। मोबाइल बाबा को खुश रखने के साथ अच्छी सेहत प्राप्त करने के लिए यह व्रत जरूरी है।

इसके लिए आपको सप्ताह में मात्र एक दिन मोबाइल फास्ट रखना है। यह दिन रविवार हो तो बेहतर है। इसके अलावा किसी अन्य दिन भी मोबाइल फास्ट रखा जा सकता है।


फ़ास्ट रखने से पहले ( Prior to fast/ पारण ):  

फ़ास्ट से एक दिन पूर्व, अर्थात् शनिवार की संध्या को मोबाइल से अनावश्यक डाटा, वीडियो, फोटो आदि डिलिट कर दे ताकि मोबाइल बाबा अपने आप को हल्का महसूस करे। इसके बाद मोबाइल को आधुनिक गंगा जल (मोबाइल साफ करने के लिए बना हुआ स्प्रे ) से अच्छी तरह साफ कर इसे स्विच ऑफ कर के सुरक्षित स्थान पर रख दें।


फ़ास्ट वाले दिन (on the day of fast) :  

व्रत वाले दिन यानि रविवार सुबह उठने के बाद मोबइल बाबा के दर्शन करें और प्रणाम करने के बाद मन में व्रत लें कि आज आप “मोबाइल फास्ट” जैसा महान काम करने जा रहे हैं और इसे सफल बनाने में मोबाइल बाबा आपको शक्ति प्रदान करें।


तत्पश्चात् आप नित्यक्रिया से निवृत हो कर और स्नान आदि करने के बाद अपने स्टडी टेबल/ ड्रेसिंग टेबल आदि के पास मोबाइल को बन्द करके रख दें और एक अगरबत्ती जलाकर एक मिनट के लिए आरती करने के बाद अगरबती को अपने घर के गमले में लगे किसी भी प्लांट के साथ या किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर स्थापित कर दें।


प्रसाद के रूप में आप घर में सुबह बनने वाले नास्ते को मोबाइल बाबा को अर्पित करने के बाद सुबह का नाश्ता करें। ध्यान रहे कि पूरे दिन आपको मोबाइल का सेवन अर्थात उसे प्रयोग नहीं करना है, अन्यथा आपका  मोबाइल फास्ट भंग हो जाएगा और आपका व्रत टूट जाएगा, जो आपकी सामाजिक, आर्थिक स्थिति और सेहत के लिए नुकसान दायक हो सकता है।


व्रत के दौरान निम्न काम करने से मोबाइल बाबा प्रसन्न होते हैं और आर्थिक-सामाजिक उन्नति प्रदान कराते है । :


सुबह का नास्ता पूरे परिवार के साथ करें । नास्ते में सात्विक भोजन जैसे फल, रोटी, खीर आदि का सेवन करें। खाना आरंभ करने से पहले परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे का अभिनंदन करें और सकारात्मक बातें करें। आप इस समय पूरे दिन में किए जाने वाले कार्य की रूप रेखा भी तैयार कर सकते हैं। आपके इस व्रत को सफल बनाने के लिए आप मोबाइल बाबा से मोबाइल प्रयोग न करने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना जरूर करें। ( हे मोबाइल बाबा, मुझे इतनी शक्ति दें कि मैं आपका प्रयोग किये बिना आज अपने कर्तव्यों का पालन कर सकूँ।) 


इस दिन का उपयोग आप कुछ नया लिखने के लिए कर सकते हैं। फेसबुक को छोड़ कर आप किसी मित्र/ सहेली या रिस्तेदार से मिलने जा सकते हैं जिससे मिले हुए काफी  दिन हो गए हों।

जब आप अपने पुराने मित्रों और रिस्तेदारों से मिलेंगे, तो आपको पुरानी बातें याद कर के जोर की हंसी आएगी, जो आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है।

वीडियो गेम खेलने के बजाये आप इस समय का उपयोग अपने मन पसंद इनडोर या आउटडोर खेल खेलने में कर सकते हैं, जिसे आप अपने  व्यस्त समय में नहीं कर पा रहे थे। इससे आप काफी हल्का महसूस करेंगे।

दिन में आपको कई ऐसे दृश्य दिखेंगे, जिसका फोटो खींचने का दिल करेगा। आपके पास मोबाइल नहीं हैं, अतः आप इसका फोटो खींचने के बजाए उसे मन के कैनवास में कैद कर लिजिए और उस पल  का असली आनंद लीजिये। सूर्योदय और सूर्यास्त तथा रात में चाँद की चाँदनी को देखते हुए आपको अद्भुत आनंद की अनुभूति होगी। इसे अनुभव कीजिए।

इस फ़ास्ट के दौरान मोबाइल से दूर होने के कारण हो सकता है आपके अन्दर चिड़चिड़ापन उत्पन्न हो, ऐसे में आपको थोड़ा धैर्य रखते हुए अपने मोबाइल फास्ट की तरफ ध्यान लगाना है। 

आपको ऑनलाइन शॉपिंग की आदत है।  कोई बात नहीं, आज आप नजदीकी बाजार जाएँ और शॉपिंग करें।  आपको जरूर कुछ नया दिखेगा।  साथ ही बाजार में आपको कुछ जाने पहचाने चेहरे भी दिखेंगे, जो कभी आपके सुख- दुःख के साथी थे।  उनका हाल खबर पूछें, आपको अच्छा अनुभव होगा।   

हो सकता है आपको मोबाइल पर फिल्म देखने की आदत हो, तो आज आप थिएटर में फिल्म देखने जाईये ।  किसी मित्र के साथ या अकेले भी जा सकते हैं।  यकीन मानिये, लोगों के साथ फिल्म देखने में आपको ज्यादा मजा आयेगा और आपका मोबाइल फास्ट भी नहीं टूटेगा।  

रात होते-होते आप यह अनुभव करेंगे कि मोबाइल का प्रयोग नहीं करने से और सोशल मीडिया के उपर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराने से आपकी जिंदगी पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा है। हाँ,  इसके अच्छे प्रभाव से आप लाभान्वित जरूर हुए हैं, जो आपको आने वाले समय में दिखेगा।

रात को सोने से पहले आपको सोशल मिडिया देखने की आदत है और इसका प्रयोग नहीं करने के कारण आपको नींद नहीं आ रही है। तो कोई बात नहीं। आपके घर में जो भी किताब उपलब्ध है, उसमें से एक कहानी पढ़ना शुरू कर दीजिये। अगर कहानी की किताब नहीं है, तो बच्चों की किताब में से भी कोई कहानी पढ़ सकते हैं। इससे आपको जल्दी नींद आ जाएगी और कुछ नए शब्द और विचार भी सीखने को मिलेंगे।


किताब पढ़ते समय आपको अपना दिमाग चलाने का अवसर मिलता है और दिमाग की एक्सरसाइज होती है। यह “अल्जाइमर” जैसी बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है और हमारी स्मरण शक्ति बढ़ती है जबकि सोशल मिडिया के प्रयोग से हमारे दिमाग में 'नाकारात्मक शक्ति’ घर कर लेती है।

जब अगली सुबह आप उठेंगे, तो आप खुद को पहले से ज्यादा तरोताजा महसूस करेंगे।

आज सोमवार है और आपको मोबाइल फास्ट नहीं रखना हैं, किन्तु अगर कल के फास्ट से आपको थोड़ा भी फायदा हुआ है, तो आज आप मोबाइल का कम प्रयोग करें, जो आपके फास्ट को ताकत प्रादान करेगा । 

इस व्रत का आप मात्र एक महीने तक पालन करके देखिये, आप अपने अन्दर के किसी भी प्रकार के डिप्रेशन और एंग्जायटी को समाप्त कर सकते हैं।


पहले महीने आप यह व्रत सिर्फ रविवार को ही रखें।  अगर आपको थोड़ा भी लाभ होता हुआ दिख रहा है, तो आप व्रत को अन्य दिनों में भी कुछ घंटों के लिए कर सकते हैं।


फिर एक दिन ऐसा आएगा, जब मोबाइल आपका गुलाम होगा न कि आप मोबाइल के गुलाम। 


सावधानी :  यदि इस व्रत के दौरान कभी भी आपको लगता है कि आपके लिए यह काफी कठिन काम है, तो आपको पहले अपने मन को नियंत्रित (वार्मअप ) करने की ज़रूरत है। आप इसकी शुरुआत कुछ घंटों के लिए भी कर सकते हैं । जैसे कि आप खाने के समय इसका प्रयोग न करें , आप इसका नोटिफिकेशन और रिंगटोन बंद करके रखें , एक जगह बैठे रहने के बाजाए आप बीच-बीच में अपनी सीट से उठ कर टहल लें , टीवी या रेडियो पर गानें सुनें आदि।


इस व्रत का नियमित पालन करने से आप की सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी, आर्थिक लाभ होगा और सेहत में सुधार होगा ऐसा, खुद मोबाइल बाबा का कहना है। यकीन न हो, तो गूगल से पूछ लें, लेकिन कंप्यूटर के माध्यम से।



सत्य सरोज

Saturday, 30 November 2024

फेसबुक फ्रेंड

 

फेसबुक फ्रेंड

मैं अपना फेसबुक अकाउंट रोज चेक करती हूँ । इसके लिए मै प्राय: अपने लैपटॉप का प्रयोग करती हूँ तथा यदा-कदा मोबाइल के माध्यम से भी फेसबुक चेक कर लेती हूँ। पिछले तीन-चार दिनों से अधिक व्यस्तता के कारण मुझे लैपटॉप ऑन करने का मौका नहीं मिला तथा मोबाइल में कुछ तकनीकी समस्या होने के कारण मैं उसका भी प्रयोग नहीं कर पाई। 
कल रविवार की छुट्टी है और काम का दबाव भी नहीं है। यह सोच कर ऑफिस से आते ही मैंने अपना फेसबुक पेज ओपन किया और दोस्तों के पोस्ट देखने बैठ गई। दो तीन दोस्तों के पोस्ट देखते और लाइक करते हुए मैं आगे बढ़ती चली गई। अगला मैसेज रिया का था, जिसे अभी कुछ मिनट पहले ही पोस्ट किया गया था। इसे पढ़कर मैं सन्न रह गई। हमेशा खुश रहने वाली तथा व्यंगात्मक मैसेज भेजने वाली रिया का मैसेज आज आशा के विपरित था। “लोगों ने मुझे रिजेक्ट किया, आज मैं सबको रिजेक्ट करती  हूँ। गुड बाई !”  इसके साथ एक फोटो भी पोस्ट किया गया था, जिसे देख कर मैंने तुरंत उसे ऑनलाइन ढूँढना शुरू कर दिया। अपनी आदत के अनुसार वह ऑनलाइन चैट के लिए उपलब्ध थी। मैंने चैटिंग शुरू कर दी।
लुधियाना में रहने वाली रिया की पिछले महीने ही एक एन.आर.आई. लड़के परविंदर से सगाई हुई थी। वह बहुत खुश थी। सगाई में शामिल होने के लिए मेरे पास भी निमंत्रण पत्र आया था, किन्तु व्यस्तता के कारण मैं कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाई। अगले महीने की दस तारीख को उसकी शादी होने वाली थी और वह हमेशा के लिए कनाडा शिफ्ट होने वाली थी, किन्तु इसी बीच पता चला की परविंदर ने कनाडा की एक स्थानीय लड़की से शादी कर ली है। यह खबर सुन कर वह बिल्कुल टूट गई। उसके सारे सपने कांच की तरह बिखर गए। वह बिल्कुल अकेली हो गई। इस मुश्किल घड़ी में उसे सहारा देने वाला कोई नहीं था। उसके मम्मी-पापा भी पिछले चार-पांच दिनों से कहीं बाहर गए थे और वह अपना गम फेसबुक के माध्यम से दोस्तों से शेयर कर रही थी। किन्तु उसे कहीं से भी भावनात्मक सपोर्ट नहीं मिल पा रहा था। इस कारण वह जीवन से निराश हो चुकी थी और इस दुनिया में नहीं रहना चाहती थी। चैटिंग के दौरान मैंने महसूस किया कि उसे मोरल सपोर्ट की सख्त जरूरत है, वरना वह बिल्कुल ही टूट जाएगी।
मैंने टैक्सी बुलाई और लैपटॉप पर चैटिंग करते हुए रिया के घर की तरफ रवाना हो गई। चंडीगढ़ से लुधियाना तक के दो घंटे के सफर के दौरान मैंने लगातार चैटिंग करते हुए उसे व्यस्त रखा।
मैं उसके दरवाजे के बाहर खड़ी थी। रिया को शायद दरवाजा बंद करने का भी होश नहीं रहा। हल्के धक्के से ही दरवाजा खुल गया। मैं रिया को ढूंढ़ते हुए उसके बेडरूम में पहुंच गई। वह लैपटॉप पर मुझसे चैटिंग में व्यस्त थी, किन्तु कमरे का नजारा सब कुछ बयान कर रहा था। दुपट्टे से बना हुया फांसी का फंदा पंखे से लटक रहा था तथा बेड पर प्लास्टिक का एक छोटा-सा स्टूल रखा हुआ था। मुझसे चैटिंग शुरू करने से पहले वह सुसाइट करने की पूरी तैयारी कर चुकी थी। मुझे देखते ही वह मुझ से लिपट गई और फूट-फूट कर रोने लगी। कहते है कि आंसू के माध्यम से हमारे सारे दर्द पानी बन कर निकल जाते हैं। रिया के दर्द भी आंसुओं के माध्यम से निकलते जा रहे थे।
मैंने अपने दोस्त को मौत के मुंह से निकाला था। किसी के लिए कुछ अच्छा करने पर कितना शुकून मिलता है, उसका एहसास पा कर मैं आनंदित हो रही थी। रिया के दर्द के आंसुओं के साथ मेरे खुशी के आंसू मिश्रित हो रहे थे।

Tuesday, 5 November 2024

आस्था का महा पर्व – छठ

 

आस्था का महा पर्व – छठ


.         





आस्था का महापर्व "छठ पूजा" की शुरुआत हो चुकी है। 

छठ लोकपर्व मुख्य रूप से  बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। यह कार्तिक शुक्ल की षष्ठी एवं सप्तमी को मनाया जाता है। सूर्य षष्ठी व्रत होनेके कारण इसे छठ कहा गया है। 
 इस क्षेत्र के प्रवासियों द्वारा यह पर्व देश - विदेश के अन्य क्षेत्रों मे भी उल्लासपूर्वक मनाया जाता है। पारिवारिक सुख-स्मृद्धि तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व स्त्री और पुरुष समान रूप से मनाते हैं।

क्यों मनाते हैं छठ पर्व

छठ व्रतके संबंधमें अनेक कथाएं प्रचलित हैं।  कहा जाता है की कि साधु की हत्या का प्रायश्चित करने के लिए जब महाराज पांडु अपनी दोनों पत्नियों के साथ वन में दिन गुजार रहे थे, उन्हीं दिनों महारानी कुंती ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से सरस्वती नदी में सूर्य की पूजा की थी। इससे कुंती पुत्रवती हुई। इसलिए संतान प्राप्ति के लिए छठ पर्व का बड़ा महत्व है। धीरे धीरे यह प्रचलन में आ गया।


एक अन्य मान्यता के अनुसार ऐसा माना जाता है की महाभारत का एक प्रमुख पात्र कर्ण, तात्कालिन अंग देश यानी आज के भागलपुर (बिहार) का राजा था।  वह नियम पूर्वक कमर तक पानी में जाकर सूर्य देव की आराधना करता था और उस समय जरुरतमंदों को दान भी देता था। कार्तिक शुक्ल षष्ठी और सप्तमी के दिन कर्ण, सूर्य देव की विशेष पूजा किया करता था।  अपने राजा की सूर्य भक्ति से प्रभावित होकर अंग देश के निवासी सूर्य देव की पूजा करने लगे। धीरे-धीरे सूर्य पूजा का विस्तार पूरे बिहार और पूर्वांचल क्षेत्र तक हो गया।

सामाजिक मान्यता

चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में शुद्धता का विशेष महत्व है।  इसे बहुत ही सादगी और पवित्रता से मनाया जाता है। इसमें बाँस से बने सूप एवं टोकरियों तथा मिट्टी के बर्तनों का ही प्रयोग किया जाता है। पर्व शुरू होने से पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई की जाती है। फिर पूजा के लिए प्रयोग होने वाली सभी सामग्रियों को बाजार से लाने के बाद अच्छी तरह धो कर ही रखा जाता है। पूजन सामग्री बेचने वाले दूकानदार भी शुद्धता का विशेष ध्यान रखते है। यह त्योहार सामूहिक रूप से लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करता है।


                                                                       यह जन सामान्य द्वारा अपने रीति-रिवाजों के रंगों में गढ़ी गई पूजा पद्धति है। इसके केंद्र में किसान और ग्रामीण जीवन है।  इस व्रत के लिए किसी पंडित या गुरु की जरूरत नहीं पड़ती है। इस उत्सव के लिए जनता स्वयं अपने सामूहिक अभियान संगठित करती है। सामूहिक रूप से नगरों की सफाइ, व्रतियों के गुजरने वाले रास्तों का प्रबंधन, तालाव या नदी किनारे अर्घ्य दान की उपयुक्त व्यवस्था आदि की जाती है । इस उत्सव में आरंभ से अंत तक समाज की अनिवार्य उपस्थिति बनी रहती है। यह सामान्य और गरीब जनता के अपने दैनिक जीवन की मुश्किलों को भुलाकर सेवा भाव और भक्ति भाव से किए गए सामूहिक कर्म का विराट और भव्य प्रदर्शन है।

व्रत का आरंभ

चार दिवसीय यह त्योहार कार्तिक शुक्ल चतुर्थी “ नहाय खाय” से आरंभ होता है।   व्रती शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं।  दूसरे दिन को ‘खरना’ कहा जाता है । इस दिन व्रतधारी दिनभर का उपवास रखने के बाद शाम को गुड से बने हुए चावल की खीर एवं रोटी छठी मैया को प्रसादके रूप में अर्पित करते हैं और व्रती इसी प्रसाद को खाते है एवं अन्य लोगों को बांटा जाता है। इसके बाद अगले दो दिन तक व्रती कूछ नहीं खाते  हैं।




तीसरे दिन अर्थात कार्तिक शुक्ल षष्ठी को दिन में छठ का प्रसाद बनाया जाता है। प्रसाद के रूप में शुद्ध देशी घी एवं आंटे का ठेकुआ, चावल के आंटे का  लड्डू, आदि बनाए जाते हैं।  इसके अलावा कई प्रकार के मौसमी फल, गन्ना, नारियल, केला आदि भी प्रसाद के रूप में शामिल होता है। शाम को पूरी तैयारी कर बाँस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है और व्रती के साथ परिवार तथा पड़ोस के सारे लोग अस्त होते हुये सूर्य को अर्घ्य देने घाट की ओर चल पड़ते हैं। सभी छठव्रती एक नीयत तालाब या नदी किनारे इकट्ठा हो, पानी में खड़े हो कर सामूहिक रूप से अर्घ्य देते हैं । इस दौरान कुछ घंटे के लिए मेले जैसा दृश्य बन जाता है।


चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह को व्रती पुनः वहीं इक्ट्ठा होते हैं जहाँ उन्होंने शाम को अर्घ्य दिया था। सुबह में उगते हुये सूर्य को अर्घ्य के साथ जल और दूध भी अर्पण किया जाता है। अंत में व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करते हैं। इसके बाद प्रसाद वितरित किया जाता है।

इस व्रत में नए चावल और गुड़ का खीर बनाने की परंपरा है।  गुड़ को चीनी से शुद्घ माना गया है। यही कारण है कि छठ पर्व में चीनी की बजाय गुड़ की खीर बनाई जाती है। इसका एक वैज्ञानिक कारण भी हैं। गुड़ की तासीर गर्म होती है और यह सुपाच्य होता है। गुड़ का सेवन व्रती को आंतरिक उर्जा प्रदान करता है जिससे इस लंबे व्रत को पूरा करने का बल मिलता है।

यह प्रायः महिलाओं द्वारा किया जाता है किंतु कुछ पुरुष भी यह व्रत रखते हैं। ‘शुरू करने के बाद छठ पर्व को सालोंसाल तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित महिला को न सौंप दें । घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि छठ पर्व करने वाली महिलाओं को संतान की प्राप्ति होती है और घर मे सुख समृद्धि आती है।
                   
*********************
लेख एवं फोटो - सत्य सरोज
            **********

Saturday, 18 May 2024

Summer vacation .... गर्मी की छुट्टी का सदुपयोग कैसे करें ?



 गर्मी की छुट्टी का सदुपयोग कैसे करें ?
******************************************
(English version)
http://satyasaroj.blogspot.com/2019/06/1-1.html

बच्चों के लिए बहुप्रतीक्षित गर्मी की छुट्टियाँ शुरू हो चुकी है।  इसका मुख्य उदेश्य बच्चों को असहनीय गर्मी से थोड़ा आराम दिलाना है। इस दौरान बच्चों को स्कूली पढ़ाई से हटकर कुछ अलग करने का मौका मिलता है। हमारे शिक्षाविदों ने गर्मी में छुट्टियों का प्रावधान इसलिए ही रखा था की हम अपने आस-पासरिस्तेदार तथा अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए कुछ समय निकाल सकें। यह ऐसा समय होता है जब माता पिता बच्चों के साथ वक्त बिता कर अपने रिस्तों को और मजबूत बना सकते हैं। इस दौरान बच्चे कुछ नया भी सीख सकते हैं और पारिवारिक परिवेश में उनका उचित सामाजिक एवं व्यक्तिगत विकास भी होता है। छुट्टी के दौरान निम्न काम जरूर करें।


    

        पारिवारिक समझ विकसित करें

किसी विद्वान ने कहा है की परिवार ही इंसान की प्रथम पाठशाला है । वर्तमान परिस्थिति में हम ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। अतः छुट्टियों में बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय व्यतीत करें। उन्हे नैतिक शिक्षा दें तथा छोटी छोटी प्रेरक कहानियाँ भी सुनाएँ।  इससे उनका ज्ञान भी बढ़ेगा और सकारात्मक सोच भी विकसित होगा। 
उन्हें खेल खेल में शिक्षित करने का प्रयास करें। आप खेल खेल में बच्चे का मानसिक विकास कर सकते हैं। अपने बचपन और अपने परिवार के इतिहास के बारे में बच्चों को बताएं। बच्चों के साथ अपने रिस्ते को और भी प्यारा बनाने के लिए आप भी बच्चे बन जाए और प्रतेक दिन उनके साथ उनके पसंद का खेल जैसे लुका छिपी, कैरम, सतरंज, क्रिकेट आदि खेलें। अपने बच्चों के साथ खाना खाएं और उन्हें इसके उत्पादन के बारे में बताएं।
माना की आपके घर में बर्तन साफ करने वाली बाई आती हैं किन्तु  खाने के बाद बच्चों को अपनी प्लेटें खुद धोने के लिए प्रेरित करें। इससे उन्हें एहसास होगा की कोई भी काम छोटा नहीं होता और वे मेहनत की कीमत भी समझेंगे।  बच्चों को गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करना भी सिखाये। इसके लिए ये काम आपको खुद भी करना पड़ेगा।

 कूकिंग एक ऐसा हुनर है जो जीवन में हमेशा काम आता है। आप अपने रसोई में छोटे छोटे कामों में उनकी मदद ले सकते हैं। अगर उनको इसकी जानकारी होगी तो आपकी बीमारी या किसी अन्य महत्वपूर्ण अवसर पर परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।



   
       रिस्तेदारी की समझ विकसित करें  

छुट्टियों में बच्चों को मामा -बुआ, दादी-नानी, चाचा- चाची आदि की दुनिया से भी अवगत कराएं। रिस्ते - नाते बचपन से ही पुख्ता होते हैं। अगर बच्चे बार बार इन रिस्तेदारों से मिलेंगे तो उनके रिस्तों में मजबूती आएगी वरना ये रिस्तें सिर्फ किताबों तक ही सिमट कर रह जाएँगे।

ऐसी नौबत न आने दे की घरों की दूरी के कारण रिस्तों में भी दूरी आ जाये और जब बच्चे अपने रिस्तेदारों से किसी शादी-व्याह या अन्य अवसर पर मिले तो एक दूसरे को पहचान भी न पाये। अतः नियमित अंतराल पर आपस में मिलना जुलना बनाए रखें। इसके लिए गर्मी की छुट्टियों से बेहतर विकल्प और कोई नहीं हो सकता।

यदि आप शहर में रहते हैं तो अपने बच्चों को गर्मियों की छुट्टियों के दौरान अपने पैतृक गांवों का दौरा करने के लिए ले जाएँ। इससे वे हमारी परम्परा और संस्कार से अवगत होंगे घर के बुजुर्ग बच्चों को सकारात्मक सीख देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्हें रिस्तेदारों के साथ घुलने मिलने दें।  उनका प्यार और भावनात्मक सहारा आपके बच्चों के लिए बहुत जरूरी है। इन यादगार लम्हों को कैमरे में जरूर कैद करें।
                




  सामाजिक समझ भी जरूरी है   

स्कूल के व्यस्त दिनचर्या में कई बार बच्चे अपने दोस्तो के घर भी नहीं जा पाते हैं। अतः छुट्टियों के दौरान उनके खास मित्रों के घर घुमाने ले कर जाएँ। इससे आप भी उनके माता पिता से परिचित हो पाएंगे और नए दोस्त बनेंगे।
इसके साथ ही बच्चों को आप अपने आस पास के रिस्तेदारों एवं मित्रों के घर भी ले कर जाएँ। इससे उन्हें नए लोगों के साथ घुलने मिलने का मौका मिलेगा जो बेहतर जीवन के लिए बहुत जरूरी है। इस दौरान आप कुछ अंजान लोगों से भी घनिष्ठता बना सकते हैं।


छुट्टी के दौरान आप अपने बच्चों को अपने साथ बाजार लेकर जाएं और उन्हे अपने आप वजन करा कर चीजें खरीदना सिखाएं। वस्तुओं की माप -तौल, भाव की जानकारी एवं कीमत की गणना से उनका गणित मजबूत होगा।
स्कूली पाठ्यक्रम से अलग बच्चों को कोई अच्छी और सकारात्मक किताब पढ़ने के लिए दें। उन्हें अच्छा बाल साहित्यमहान व्यक्तियों की जीवनी तथा अन्य ज्ञानवर्धक पुस्तकें दे सकते हैं । उन्हें पुस्तकालय जाने के लिए प्रेरित करें और पढे गए विषय को लिखने के लिए कहें। इससे उनकी लिखने की क्षमता का विकास होगा। 
   



बच्चों को खुद को समझने का मौका दें और उन्हे स्वयं परिपक्व होने दें। कभी-कभी बच्चों के द्वारा किए गए कामों की प्रशंसा भी करे जो उन्हें प्रोत्साहित करेगी। उनके द्वारा किए गए कामों में गलतियां भी होंगीउसके लिए तैयार रहे। उन्हे डांटे फटकारे नहीं बल्कि समझाएं और उन्हें अपनी गलतियों से सीखने का मौका दें।

  भ्रमण के लिए ले कर जाये :

 

इस दौरान कुछ समय भारत भ्रमण के लिए निकालें और आस पास के किसी ठंढे स्थान पर जाएँ। इससे बच्चों का मनोरंजन तो होता ही हैसाथ ही ज्ञान भी बढ़ता है। आस पास के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक स्थानों की सैर भी कराएं एवं उस स्थान के महत्व को समझाएँ। इसे भारत के नक़्शे पर भी समझाने की कोशिश करें तो बेहतर होगा। इसके लिए भारत का एक राजनैतिक एटलस साथ में रख सकते है। गूगल की मदद बिल्कुल ना लें  इन स्थानों से वापस आने के बाद बच्चों को अपने अनुभव एक डायरी में लिखने को कहें। यह उनके प्रोजेक्ट वर्क में सहायक होगा।
    

 प्रकृति से परिचय कराएं  

बच्चों को कुछ समय निकाल कर प्रकृति से परिचय कराएं। उन्हें बाग बगीचे की सैर कराएं और किताबों में पढे गए विभिन्न पेड़ पौधों की पहचान कराएं । उनमें इतनी समझ विकसित करें की वे पेड़-पौधों को देख कर उसकी पहचान कर सकें। इसके लिए आप उन्हें चिड़ियाघर तथा अपने गाँव या आस पास के किसी गाँव की सैर भी करा सकते हैं। अगर मौका मिले तो गाँव के बच्चों द्वारा खेले जा रहे खेल में भी इनको शामिल करें। इससे उन्हें कुछ नया सीखने को मिलेगा। गाँव भ्रमण के दौरान आप उन्हे नदी- तालाब आदि से भी परिचित कराएं। उन्हें यह भी एहसास कराएं की गाँव के लोग किस विषम परिस्थिति में और अभावों के बीच जीवन यापन करते हैं।


बागवानी
 एक ऐसा काम है जिससे सुकून मिलता है और मन प्रसन्न होता है। बच्चों को वृक्ष के महत्व को समझाये और उन्हें वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करें। यह बच्चों को प्रकृति से जोड़ने का सबसे अच्छा तरीका है । उन्हे अलग-अलग किस्म के बीज लाकर गमलों में लगाने के लिए दें । पानी डालना, खाद डालना गुड़ाई करना जैसी जिम्मेदारी उन पर छोड़े। जब बच्चे इन पौधों को विकसित होते हुये देखेंगे तो बहुत प्रसन्न होंगे। इससे उनके अंदर जिम्मेदारी की भावना का विकास होता है।
  




गर्मी की छुट्टियाँ काफी लंबी होती है। अतः बच्चा बोर न होइसके लिए उन्हें उनके पसंद के अनुरूप कुछ नया सिखाया जा सकता है। इसके तहत उन्हें तैराकीपेंटिंग , गीत-संगीतकूकिंग आदि की अतिरिक्त शिक्षा दी जा सकती है और उनके ऊर्जा का समुचित इस्तेमाल किया जा सकता है।

बच्चों को मोबाइल से दूर रखने का प्रयास करें। अगर आप उनको अन्य रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रखेंगे तो मोबाइल की तरफ उनका ध्यान नहीं जाएगा। इस दौरान बच्चों के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखें ताकि वे बीमार न हो जाये । उन्हें पौस्टिक भोजन एवं मौसमी फल खाने को जरूर दें। पानी का अधिक सेवन भी फायदेमंद रहेगा। इन सभी पर अमल कर के हम अपने बच्चे की छुट्टी का सही उपयोग कर सकते हैं। यह उनके लिए एक यादगार लम्हा साबित होगा।

  
                               

रचना एवं फोटोग्राफ : @ सत्य सरोज 

Suggested Book for parents. : Iconic Parent ( Coming soon) 

Thursday, 2 May 2024

How to utilize the summer vacation

How to utilize the summer vacation ?
https://satyasaroj.blogspot.com/2019/06/1-1.html
(Hindi version) 

The most awaited summer vacations have begun for the kids and parents.  Its main objective is to provide some relief to the children from the unbearable heat. During this vacation, children get a chance to do something different apart from their school studies. Our educationists have made provision for summer vacations only so that we can spare some time for our surroundings, relatives and for the development of our personality. This is the time when parents can strengthen their bond by spending time with their children.  During this, children can also learn something new and they also have proper social and personal development in the family environment. Must do the following things during the summer vacation.  



Some scholar has said that family is the first school of any person.  In the present circumstances, we are not able to follow this.  So, spend more and more time with the children during the holidays. Give them moral education and also tell small inspirational stories. With this, their knowledge will also increase and positive thinking will also develop.

Try to educate them in simple manner.  You can develop mental ability of the child by playing with them.  Tell the children about your childhood and your family history. To make your relationship with children sweeter, you may also become a child and play with them every day their favorite games like hide and seek, carrom, chess, cricket etc.  Take lunch and dinner with your kids and tell them about its production of the crops.

 
It may be that you have a servant to cleans the utensils in your house but encourage the children to wash their plates themselves after eating.  This will make them realize that no work is small and they will also understand the value of hard work. Also teach children to help the poor and needy. For this, you will have to do this work yourself also.

  

Cooking is a skill that always helpful in our life. You can take their help in small tasks in your kitchen. If they are aware of about this, then you will not have to face any trouble during your illness or any other important occasion.




During the holidays, let the children familiar to maternal uncle-aunt, grandmother-grandfather, uncle-aunt etc.  Relationships became strong from childhood. If the children meet these relatives again and again, then their relations will get stronger, otherwise these relations will be limited to books only. 

Don't let such a situation come that due to the distance of the houses, there is a distance in the relations and when the children meet their relatives on any marriage or other occasion, they do not even recognize each other.  So, keep meeting each other at regular intervals. For this, there can be no better option than summer vacations.

   

If you live in the city, take your kids to visit your native villages during summer vacations. By this they will be aware of our tradition and culture. The elders of the house can play an important role in giving positive lessons to the children. Let them mingle with relatives. Their love and emotional support is essential for your children. Do capture these memorable moments in the camera.

     

Social understanding is also important 

In the busy routine of school, many times children are not    able to even go to their friend’s house. So, during the holidays, take them to visit their close friends. With this you will also be able to get familiar with their parents and make new friends. 

Along with this, you should also take the children to the homes of relatives and friends around you. This will give them a chance to mingle with new people which is very important for a better life. During this period, you can also build intimacy with some unknown people.





Take your children with you to the market during the holidays and teach them to buy groceries/ house hold items by weighting themselves. Their maths will be strengthened by the measurement of things, information about price and calculation of price.

Give children a good and positive book to read apart from the school curriculum. They can be given good children's literature, biographies of great persons and other informative books. Encourage them to go to the library and ask them to write down what they read. This will develop their writing ability. 


 


Give children a chance to understand themselves and let them mature on their own. Sometimes also praise the work done by the children which will encourage them. There will be mistakes in the work done by them, be ready for that. Do not scold them but explain them and give them a chance to learn from their mistakes.

Take for a tour: 


During this vacation, take some time out to visit India and visit some cool place nearby. This not only entertains the children, but also increases their knowledge. Also take a tour of important historical and religious places nearby and explain the importance of that place. It would be better if you try to explain it on the map of India as well. For this, a political atlas of India can be kept together.

  

Do not take the help of Google at all. After coming back from these places ask the children to write down their experiences in a diary. It will be helpful in their project work.

Introduce to nature


Take out some time and introduce the children to nature. Take them for a tour of the garden and let them identify the different type of  trees and plants studied in the books. 
     


Develop such understanding in them that they can identify trees and plants by looking at them. For this, you can also take them to the zoo and visit your village or any nearby village. If you get a chance, involve them in the games being played by the children of the villages. This will give them something new to learn. During the tour of the village, you should also introduce them to the river-pond etc. Make them also realize that how the people of the villages live in adverse conditions and in the midst of scarcity.

 

Gardening is such a work that gives peace and makes the mind happy. Explain the importance of trees to the children and motivate them to plant trees. It is the best way to connect kids with the nature. Bring them different types of seeds and give them to plant in pots. Leave the responsibility like watering, fertilizing and hoeing on them. Children will be very happy when they see these plants growing. This develops a sense of responsibility in them. 
 


Summer vacations are long. So that the child does not get bored, he can be taught something new according to his choice. They can be given additional education in swimming, painting, music, cooking etc. and their energy can be used properly.

Try to keep children away from mobile. If you keep them busy in other creative works then their attention will not go towards mobile. During this, take care of the health of the children so that they do not fall sick. Make sure to give them nutritious food and seasonal fruits. Drinking more water will also be beneficial. By following all these, we can make proper use of our child's holidays. This will prove to be a memorable moment for him.


Article and Photographs: @ Satya Saroj
Suggested Book for parents. : Iconic Parents