दोस्तों , मेरा पहला ब्लॉग वसंत ऋतु को समर्पित ।
चारों ओर हरियाली है,
नए फूल नई डाली है,
झूम रहा हर पत्ता-पत्ता,
प्रकृति में खुशहाली है,
पतझड़ का करके अंत,
देखो आया ऋतुराज वसंत।
प्रकृति का यौवन निखरे,
खुशियों के अमृत बिखरे,
रंग बिरंगे फूल खिले,
जीवन को नव रक्त मिले,
पीछे छूट गया हेमंत,
देखो आया ऋतुराज वसंत।
नई उमंगें,
नई तरंगें,
ले कर नए नए त्योहार,
सुप्त धमनियों में मानव के,
करता नया रक्त संचार,
ऊर्जा जग में भरे अनंत,
देखो आया ऋतुराज वसंत।
खूब सुनहरी धूप खिली,
बागों में कोयल बोली,
बनी धरा जैसे दुल्हन,
सजी धजी इसकी डोली,
खुशियों की सौगात अनंत,
लेके आया ऋतुराज वसंत।
23 comments:
Ati sundar.....bahut badhai..
बहुत सुंदर ...मौसम के अनुकूल ... सामयिक रचना .. बधाई
बहुत सुंदर ...मौसम के अनुकूल ... सामयिक रचना .. बधाई
अच्छा प्रयास है। उम्मीद है की वसंत में आपके ब्लॉग और भी निखरेंगे।
Very nice sir... Keep it up...
Bahut hi sunder
बनी धरा जैसे दुल्हन
बधाई हो सत्य जी
अति सुन्दर, बिल्कुल बसंत जैसा!
बसंत का अति सुन्दर विवरण.....
thanks for feed back
What a lovely great poem
Bahut achha likhe!! Keep it up!!
Great poem
Very beautiful lines on basant
Great Sir👍
Bahut sundar
बहुत सुन्दर रचना...
Awesome Sir
Bahut sunder
Amazing 🙏
बहुत खूब
मन भयो वसंत तन भयो वसंत
अति सुंदर
मन भयो वसंत तन भयो वसंत
तू भी वसंत मैं भी वसंत
आओ बनायें जहाँ वसंत
Super sir
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