Wednesday, 25 January 2023

गणतंत्र दिवस


 संविधान निर्माण और उसकी प्रक्रिया 


आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है।  हमारा देश 15 अगस्त 1947 ईo को आजाद हो गया था परन्तु अपना संविधान नहीं होने का कारण देश 15 अगस्त 1947 ईo  से संविधान लागू होने तक एक ब्रिटिश उपनिवेश के रूप में ही जाना जाता था और इसका प्रशासन गवर्नर जनरल के हाँथ में था । 26 जनवरी 1950 को भारत को गणतंत्र घोषित किया गया जिसका अर्थ है- भारत का राष्ट्राध्यक्ष “राष्ट्रपति”  निर्वाचित होगा न कि आनुवांशिक।‍ 

                  

 आइये जानते हैं की हमारे संविधान का निर्माण कैसे हुआ ? 


जब अंग्रेजो द्वारा 1935 ईo में “भारत सरकार अधिनियम -1935” लागू किया जा रहा था उसी समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के द्वारा देश के लिए अलग संविधान बनाने की मांग उठी थी परन्तु ब्रिटिश सरकार ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया । कुछ वर्ष वाद द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया और विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद इंग्लैंड  में सरकार बदल गई । इस प्रकार भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बदली हुई परिश्थिति में अंग्रेजों ने  यह महसूस किया की भारत पर अब ज्यादा दिन शासन नहीं किया जा सकता और उसे आजाद कर देना ही उचित है । अतः भारत को शांतिपूर्ण सत्ता हस्तानान्तरण के उपायों एवं संभावनाओं को तलाशने के लिए सरकार द्वारा एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय शिष्टमंडल भेजने की घोषणा की गई  जिसे “कैबिनेट मिशन” का नाम दिया गया । इस कमेटी ने मई 1946 में अपनी रिपोर्ट सरकार को दी जिसमें स्वतंत्रता से पहले भारत के लिए एक अलग संविधान निर्माण की बात कही गई और उसके लिए विस्तृत योजना प्रस्तुत की गई । 

                

              संविधान सभा का गठन 

कैबिनेट मिशन योजना के आधार पर  भारतीय संविधान का निर्माण के लिए एक संविधान सभा का गठन किया गया। संविधान सभा का निर्वाचन परोक्ष रूप से आनुपातिक प्रतिनिधित्व तथा पृथक साम्प्रदायिक निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर 1934 ई॰ में गठित प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा किया गया। इस समय देश में कुल 542 देशी रियासतें थी।

 संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन 09 दिसंबर 1946 ई. को हुआ। इसी दिन डाo सच्चिदानंद सिन्हा को संविधान सभा का अस्थाई अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 11 दिसंबर 1946 को डाo राजेन्द्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष चुना गया। इस संविधान सभा का संवैधानिक सलाहाकार श्री बी.एन. राव को नियुक्त किया गया था। संविधान सभा ने संविधान निर्माण के कार्य को तीव्र गति से और समय पर पूरा करने के लिए 22 समितियों का निर्माण किया था जिसमें प्रारूप समिति सबसे प्रमुख थीं। इसका काम संविधान की रूपरेखा तैयार करना था।  29  अगस्त 1947 ईo को गठित इस समिति के अध्यक्ष डाo भीमराव आंबेडकर को बनाया गया ।     

 आरंभ में संविधान सभा के कुल 389 सदस्य थे। 15 अगस्त 1947 ईo को आजादी की घोषणा और पकिस्तान के अलग देश बन जाने के कारण  पाकिस्तान के लिए अलग संविधान सभा गठित हो गया और भारतीय संविधान सभा में सदस्यों की संख्या घटकर 299 हो गई। 

डाo भीमराव आंबेडकर द्वारा तौयार  संविधान का प्रारूप,  संविधान सभा के अध्यक्ष के सम्मुख 4 नवम्बर 1949 ई. को लाया गया । स्वाधीन भारत के संविधान पर सभा के अध्यक्ष डाo राजेन्द्र प्रसाद ने 26 नवम्बर 1949 को हस्ताक्षर किये। 26 नवम्बर 1949 को 284 सदस्यों ने संविधान पर हस्ताक्षर किये। इसी दिन संविधान सभा ने संविधान को अंगीकृत, अधीनियमित, और आत्मार्पित किया। नागरिकता, निर्वाचन और अंतरिम संसद से संबंधित सभी उपबंध (अनुच्छेद) तत्काल प्रभाव से (26 नवम्बर 1949) को  लागु कर दिये गए। शेष संविधान को 26 जनवरी 1950 से लागु किया गया ।  इसलिए अनुo 394 के अनुसार 26 जनवरी 1950 को संविधान की प्रवर्तन की तिथि कहते है। 26 जनवरी 1950 को संविधान सभा का अंतरिम संसद में परिवर्तन कर दिया गया और भारत को एक गणराज्य घोषित किया गया ।


भारतीय संविधान के श्रोत :

संविधान निर्माताओं ने इस बात का विशेष ध्यान रखा की भारत का संविधान दुनिया में सबसे श्रेष्ट हो और जनता के हित में हों । इसके लिए उन्होंने विश्व के विभिन्न देशों के संविधान का अध्ययन किया और उन में से सभी अच्छी बातों का समावेश भारत के संविधान में किया । इसका मुख्या श्रोत “ 1935 का भारत सरकार अधिनियम” था । इसकी लगभग 200 धाराओं को कुछ अक्षरशः तथा कुछ वाक्यों में थोड़े से परिवर्तन के बाद ज्यो-का-त्यों अपना लिया गया है। 1928 ईo का नेहरु रिपोर्ट से भी कुछ उपबंधों की ग्रहण किया गया । इसके आलावा अन्य देशों की जो मुख्य कानून ग्रहण किये गए वो इस प्रकार है 

ब्रिटिश संविधान सेः- संसदात्मक शासन प्रणाली, संसद प्रक्रिया, विधि निर्माण, एकल नागरिकता एवं संसदीय विशेषाधिकार।

आयरलैंड के संविधान से :- नीति निर्देशक तत्व, राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के सदस्यों का मनोनयन, राष्ट्रपति का निर्वाचन प्रणाली।

कनाडा से :- संघात्मक शासन व्यवस्था।

आस्ट्रेलिया के संविधान से :- केन्द्र व राज्य के बीच शक्तियों का विभाजन, समवर्ती सुची, प्रस्तावना की भाषा।

दक्षिण अफ्रीका से :- संविधान संशोधन की प्रक्रिया।

पूर्व सोवियत संघ से :- 10 मौलिक कर्त्तव्य।

जर्मनी से :- आपातकालीन उपबंध।

इस प्रकार भारतीय संविधान विभिन्न देशों द्वारा अपनाए गए उपबन्धों का श्रेष्ठ संकलन है। 

सत्य सरोज