Sunday, 26 August 2018

सावन और साजन

सावन आया बादल बरसे,
दरस को तेरे नैना तरसे।
इन आँखों में आ के देखो,
छम छम कितने आँसू बरसे।
टूटे मेरे सपने सारे,
बदरा ले जा नीर हमारे।

भाए न  कोई श्रृंगार ,
तेरे बिन जीना दुस्वार।
सावन की ठंढ़ी फुहार,
बहुत सताये अबकी बार।
रहना मुझको संग तिहारे,
बदरा ले जा नीर हमारे।

काटे नहीं कटे ये दिन,
कैसे जीऊँ मैं तेरे बिन।
तोड़ के जग के बंधन सारे,
आ जाओ तुम पास हमारे।
आने की ये बाट निहारे,
बदरा ले जा नीर हमारे।