Wednesday, 17 December 2025

चंडीगढ़ वार्षिक गुलदाउदी शो ................ जहां खिल जाएगा आपका चेहरा

 

चंडीगढ़ का प्रसिद्ध तीन दिवसीय गुलदाउदी शो 18 दिसंबर से

 

शिवालिक पहाड़ी की तलहटी में बसा मनमोहक शहर चंडीगढ़,  दिल्ली  और आस पास वालों के लिए लॉन्ग ड्राइव का सबब है। एक फ्रांसीसी वास्तुविद् द्वारा डिजाइन किए गए इस शहर को ढेर सारे उद्यानों के कारण सिटी ऑफ गार्डन्स भी कहा जाता है। यहां एक
से एक सुंदर बगीचे हैं
, जहां सालभर रौनक देखी जा सकती है।

 

ऐसा ही एक गार्डन है टैरेस गार्डन, 'जो सेक्टर 33 के मध्य में स्थित है। लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में फैले इस गार्डन में प्रत्येक वर्ष दिसम्बर के दूसरे सप्ताह में गुलदाउदी शो का आयोजन किया जाता है।

 


नगर निगम चंडीगढ़ द्वारा इस वर्ष आज से 38 वां वार्षिक गुलदाउदी शो का आयोजन किया जा रहा है। 19 से 21  दिसम्बर 2025 तक चलने वाले इस शो के दौरान गुलदाउदी फूल की 270 प्रजातियों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

 

आकार में गुलाब से भी छोटे और डहलिया से भी बड़े तथा अनेक रंग- डिजाइनों के गुलदाउदी के फूलों को यहां एक साथ देखा जा सकता है। इस शो में भाग लेने के लिए सरकारी, अर्धसरकारी तथा शौकिया लोगों को उनकी नर्सरी के फूलों के साथ आमंत्रित किया जाता है तथा उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कृत भी किया जाता है। इस गुलदाउदी शो को देखने के लिए दुनियाभर से पर्यटक और गुलदाउदी प्रेमी आते हैं। इस शो के दौरान तीनों दिन तरह-तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा फूलों से संबंधित प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया जाता है।

तो आइये इसका आनंद उठाते हैं ....

 

 






 Article and Photo: Satya Saroj. 

How to prepare for Board Examination. (1) परीक्षा की तैयारी।




How to prepare for Board Examination. (1) 

बोर्ड परीक्षा की तैयारी योजना अभी से बनाएं


दीपावली के त्यौहार के का उत्साह अभी खत्म भी नहीं हुआ था की परीक्षा की तारीख घोषित  हो गई और उसमें शामिल हो रहे छात्रों व उनके अभिभावकों को एक अनचाहे डर’ ने घेर लिया  है।  छात्र व अभिभावक परेशान होने लगे हैंजो ठीक नहीं है।  ऐसे समय में क्या करें क्या नहींबेहतर परिणाम के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए , आइए जानते हैं ।
****************************** 
आज की बढ़ती गला काट प्रतियोगिता ने बच्चों से ज्यादा उनके अभिभावकों को चिन्ता में डाल दिया है। कोई भी माता-पिता यह नहीं चाहता कि उसका बच्चा परीक्षा में फेल हो या कम नंबर प्राप्त करें। अभिभावक की यह मानसिकता होती है कि जो काम वे खुद नहीं कर सकेवह उनका बच्चा करे। वे अपने बच्चों से काफी ज्यादा अपेक्षा रखते है। कई बार तो अभिभावक इसे अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लेते है।

अभिभावक की तरफ से बच्चों को बात-बात पर रोक-टोक किया जाता है। टीवी मत देखोदोस्तों से बात मत करोखेलना बन्द करो आदि दबाव डाला जाता है। दूसरे बच्चों से उनकी तुलना भी की जाती है जो ऐसा कोई भी अतिरिक्त काम नहीं करते और सारा दिन पढ़ाई में लगे रहते हैं। इस प्रकार के अनावश्यक दबाव के कारण बच्चे तनाव से ग्रसित हो जाते हैं। उनके अंदर यह डर घर कर जाता है कि अगर वे फेल हो गए या उम्मीद से कम नम्बर आए तो क्या होगाउन्हें अपने अभिभावक से अपमानित होना पड़ेगा अथवा अच्छे कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल पाएगा आदि जैसी चिंताएं घर कर जाती हैं। इसके आलावा परीक्षा को लेकर कई अन्य शंकाएं जैसे अगर पेपर कठिन हुआ तो क्या करुंगाअगर पढ़ा हुआ याद नहीं रहा तो क्या करुंगा आदि भी सताती रहती है। 

इस प्रकार बच्चा मानसिक और भावनात्मक दबाव का शिकार हो जाता हैजिसका प्रभाव उसके प्रदर्शन पर साफ दिखता है। परिणामस्वरूप उसका रिजल्ट उम्मीद से भी काफी खराब हो जाता है।
कई परिवारों में घर के सदस्यों के बीच छोटी-छोटी बातों पर भी झगड़ा होता रहता है। इससे घर का माहौल तनावपूर्ण बन जाता हैजिसका असर घर के बच्चों पर भी पड़ता है। अत: अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कम से कम परीक्षा के दिनों में घर के आपसी झगड़ों से दूर रहे। शांति का माहौल कायम करें तथा बच्चें के साथ प्यार पूर्वक पेश आएं।

हार-जीत तो चलती ही रहती है। यह जरूरी नहीं है कि सभी बच्चे 95 या 98 नंबर ही प्राप्त करे। परीक्षा का परिणाम बच्चों के मानसिक एवं पारिवारिक स्थिति से भी प्रभावित होता है। यदि परिवार में किसी प्रकार की समस्या है तो इससे सकारात्मक तरीके से निपटने की कोशिश करनी चाहिए।
परीक्षा परिणाम खराब हो जाने से जिंदगी नहीं रूकती। दुबारा प्रयास करना चाहिए और हो सकता है परिणाम अच्छा हो। हताश हो जाना इसका निवारण नहीं है। परीक्षा के डर एवं खराब परिणाम से हताश हो कर कई बच्चें अपनी जान गवां देते हैंजो अत्यधिक अपेक्षाओं का परिणाम है।

छात्रों को चाहिए कि सकारात्मक सोच के साथ एक निश्चित रूटीन पर अमल करते हुए अपनी तैयारी पूरी तनमयता के साथ करें। परिवार में छोटी-मोटी समस्याएं आती रहती हैंजिसका निदान घर के बड़ों को करना है और बच्चों को इससे दूर रह कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। अगर घर की किसी गतिविधि से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है तो उन्हें इस बारे में अपने अभिभावक से बात करनी चाहिए। 
परीक्षा के दौरान प्रकृति के जितना करीब रहें,उतना ही अच्छा है। सुबह जल्दी उठकर सैर करना चाहिए तथा रात को सोने से पहले भी थोड़ी देर खुली हवा में टहलना चाहिए। कुछ देर योग करना मानसिक शांति के लिए बहुत जरूरी है। हरी सब्जीसागफल एवं अन्य प्राकृतिक पदार्थ भोजन में शामिल करने से बीमारियां दूर रहती है और दिमागी तनाव भी नहीं होता। 

बच्चों को चाहिए कि वह कुछ दिनों के लिए अनावश्यक कामों को छोड़ कर रूटीन के अनुसार पढ़ाई करें। पूर्व में पढ़ी गई सामग्रियों  को दोबारा रिवाइज करें तथा कठिन प्रश्नों को बार-बार पढ़ते रहें। महत्वपूर्ण चार्टफार्मूलाडायग्राममैप आदि को अपने स्टडी रूम में दीवार पर टांग देंताकि बार-बार देखते रहने से वह हमेशा आपके जेहन में रहे। यादि आप एकाग्रता के साथ पढ़ाई करते हुए इन छोटी-छोटी बातों पर अमल करते हैं तो सफलता निश्चय ही आपके कदम चूमेगी।


*************************************************
https://www.blogger.com/blog/post/edit/7649825435783466067/407394901003288946

अभिभावक क्या करें,और  क्या नहीं,  छात्रों के लिए आवश्यक सुझाव तथा परीक्षा हाल में  क्या करें, जानने के लिए अगले अंक का  इंतजार करें।
https://www.blogger.com/blog/post/edit/7649825435783466067/407394901003288946