गर्मी की छुट्टी का
सदुपयोग कैसे करें ?
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(English version)
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बच्चों के लिए बहुप्रतीक्षित गर्मी की छुट्टियाँ शुरू हो चुकी है। इसका मुख्य उदेश्य बच्चों को असहनीय गर्मी से थोड़ा आराम दिलाना है। इस दौरान
बच्चों को स्कूली पढ़ाई से हटकर कुछ अलग करने का मौका मिलता है। हमारे शिक्षाविदों
ने गर्मी में छुट्टियों का प्रावधान इसलिए ही रखा था की हम अपने आस-पास, रिस्तेदार
तथा अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए कुछ समय निकाल सकें। यह ऐसा समय होता है जब
माता पिता बच्चों के साथ वक्त बिता कर अपने रिस्तों को और मजबूत बना सकते हैं। इस दौरान
बच्चे कुछ नया भी सीख सकते हैं और पारिवारिक परिवेश में उनका उचित सामाजिक एवं
व्यक्तिगत विकास भी होता है। छुट्टी के दौरान निम्न काम जरूर करें।
पारिवारिक समझ विकसित करें
किसी विद्वान ने कहा है की
परिवार ही इंसान की प्रथम पाठशाला है । वर्तमान परिस्थिति में हम ऐसा नहीं कर पा
रहे हैं। अतः छुट्टियों में बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय व्यतीत करें। उन्हे
नैतिक शिक्षा दें तथा छोटी छोटी प्रेरक कहानियाँ भी सुनाएँ। इससे उनका ज्ञान भी बढ़ेगा और सकारात्मक सोच भी
विकसित होगा।
उन्हें खेल खेल
में शिक्षित करने का प्रयास करें। आप खेल – खेल में बच्चे का मानसिक विकास कर सकते हैं। अपने बचपन और अपने परिवार के इतिहास के बारे में बच्चों को बताएं। बच्चों के साथ
अपने रिस्ते को और भी प्यारा बनाने के लिए आप भी बच्चे बन जाए और प्रतेक दिन उनके
साथ उनके पसंद का खेल जैसे लुका छिपी, कैरम, सतरंज, क्रिकेट आदि खेलें। अपने बच्चों के साथ
खाना खाएं और उन्हें इसके
उत्पादन के बारे में बताएं।
माना की आपके घर में बर्तन साफ करने वाली बाई
आती हैं किन्तु खाने के बाद बच्चों को अपनी प्लेटें खुद धोने के लिए प्रेरित करें। इससे उन्हें एहसास होगा की कोई भी काम छोटा
नहीं होता और वे मेहनत की कीमत भी समझेंगे। बच्चों को गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करना भी सिखाये। इसके
लिए ये काम आपको खुद भी करना पड़ेगा।
कूकिंग एक
ऐसा हुनर है जो जीवन में हमेशा काम आता है। आप अपने रसोई में छोटे छोटे कामों में
उनकी मदद ले सकते हैं। अगर उनको इसकी जानकारी होगी तो आपकी बीमारी या किसी अन्य
महत्वपूर्ण अवसर पर परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
रिस्तेदारी की समझ
विकसित करें
छुट्टियों में
बच्चों को मामा -बुआ, दादी-नानी, चाचा- चाची आदि की दुनिया से भी अवगत
कराएं। रिस्ते - नाते बचपन से ही पुख्ता होते हैं। अगर बच्चे बार बार इन
रिस्तेदारों से मिलेंगे तो उनके रिस्तों में मजबूती आएगी वरना ये रिस्तें सिर्फ
किताबों तक ही सिमट कर रह जाएँगे।
ऐसी नौबत न आने दे
की घरों की दूरी के कारण रिस्तों में भी दूरी आ जाये और जब बच्चे अपने रिस्तेदारों
से किसी शादी-व्याह या अन्य अवसर पर मिले तो एक दूसरे को पहचान भी न पाये। अतः
नियमित अंतराल पर आपस में मिलना जुलना बनाए रखें। इसके लिए गर्मी की छुट्टियों से
बेहतर विकल्प और कोई नहीं हो सकता।
यदि आप शहर में
रहते हैं तो अपने बच्चों को गर्मियों की छुट्टियों
के दौरान अपने पैतृक गांवों का दौरा करने के लिए ले जाएँ। इससे वे हमारी परम्परा और संस्कार से अवगत होंगे । घर के बुजुर्ग बच्चों को सकारात्मक सीख देने में
अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्हें रिस्तेदारों के साथ घुलने मिलने दें। उनका
प्यार और भावनात्मक सहारा आपके बच्चों के लिए बहुत जरूरी है। इन यादगार लम्हों को कैमरे में जरूर कैद करें।
सामाजिक समझ भी जरूरी है
स्कूल
के व्यस्त दिनचर्या में कई बार बच्चे अपने दोस्तो के घर भी नहीं जा पाते हैं। अतः
छुट्टियों के दौरान उनके खास मित्रों के घर घुमाने ले कर जाएँ। इससे आप भी उनके
माता पिता से परिचित हो पाएंगे और नए दोस्त बनेंगे।
इसके
साथ ही बच्चों को आप अपने आस पास के रिस्तेदारों एवं मित्रों के घर भी ले कर जाएँ।
इससे उन्हें नए लोगों के साथ घुलने मिलने का मौका मिलेगा जो बेहतर जीवन के लिए
बहुत जरूरी है। इस दौरान आप कुछ अंजान लोगों से भी घनिष्ठता बना सकते हैं।
छुट्टी
के दौरान आप अपने बच्चों को अपने
साथ बाजार लेकर जाएं और उन्हे अपने आप वजन करा कर चीजें खरीदना सिखाएं। वस्तुओं की माप -तौल, भाव की जानकारी एवं कीमत की गणना से उनका
गणित मजबूत होगा।
स्कूली
पाठ्यक्रम से अलग बच्चों
को कोई अच्छी और सकारात्मक किताब पढ़ने के लिए दें। उन्हें अच्छा बाल साहित्य, महान व्यक्तियों की जीवनी तथा अन्य ज्ञानवर्धक पुस्तकें दे सकते हैं ।
उन्हें पुस्तकालय जाने के लिए प्रेरित करें और पढे गए विषय को लिखने के लिए कहें।
इससे उनकी लिखने की क्षमता का विकास होगा।
बच्चों
को खुद को समझने का मौका दें और उन्हे स्वयं परिपक्व होने दें। कभी-कभी बच्चों के
द्वारा किए गए कामों की प्रशंसा भी करे जो उन्हें प्रोत्साहित करेगी। उनके द्वारा किए गए कामों में गलतियां भी होंगी, उसके
लिए तैयार रहे। उन्हे डांटे फटकारे नहीं बल्कि समझाएं और उन्हें अपनी
गलतियों से सीखने का मौका दें।
भ्रमण के लिए ले कर जाये :
इस दौरान कुछ समय भारत भ्रमण के लिए निकालें और आस पास के किसी ठंढे स्थान
पर जाएँ। इससे बच्चों का मनोरंजन तो होता ही है, साथ ही
ज्ञान भी बढ़ता है। आस पास के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक स्थानों की सैर भी
कराएं एवं उस स्थान के महत्व को समझाएँ। इसे भारत के नक़्शे पर भी समझाने की कोशिश
करें तो बेहतर होगा। इसके लिए भारत का एक राजनैतिक एटलस साथ में रख सकते है। गूगल की मदद बिल्कुल ना लें। इन स्थानों से वापस आने के बाद बच्चों को अपने अनुभव एक डायरी में लिखने
को कहें। यह उनके प्रोजेक्ट वर्क में सहायक होगा।
प्रकृति से परिचय कराएं
बच्चों
को कुछ समय निकाल कर प्रकृति से परिचय कराएं। उन्हें बाग बगीचे की सैर कराएं और
किताबों में पढे गए विभिन्न पेड़ पौधों की पहचान कराएं । उनमें इतनी समझ विकसित
करें की वे पेड़-पौधों को देख कर उसकी पहचान कर सकें। इसके लिए आप उन्हें चिड़ियाघर
तथा अपने गाँव या आस पास के किसी गाँव की सैर भी करा सकते हैं। अगर मौका मिले तो
गाँव के बच्चों द्वारा खेले जा रहे खेल में भी इनको शामिल करें। इससे उन्हें कुछ
नया सीखने को मिलेगा। गाँव भ्रमण के दौरान आप उन्हे नदी- तालाब आदि से भी परिचित
कराएं। उन्हें यह भी एहसास कराएं की गाँव के लोग किस विषम परिस्थिति में और अभावों
के बीच जीवन यापन करते हैं।बागवानी एक ऐसा काम है जिससे सुकून मिलता है और मन प्रसन्न होता है। बच्चों को वृक्ष के महत्व को समझाये और उन्हें वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करें। यह बच्चों को प्रकृति से जोड़ने का सबसे अच्छा तरीका है । उन्हे अलग-अलग किस्म के बीज लाकर गमलों में लगाने के लिए दें । पानी डालना, खाद डालना गुड़ाई करना जैसी जिम्मेदारी उन पर छोड़े। जब बच्चे इन पौधों को विकसित होते हुये देखेंगे तो बहुत प्रसन्न होंगे। इससे उनके अंदर जिम्मेदारी की भावना का विकास होता है।
गर्मी
की छुट्टियाँ काफी लंबी होती है। अतः बच्चा बोर न हो, इसके लिए उन्हें उनके पसंद के अनुरूप कुछ नया सिखाया जा सकता है। इसके तहत
उन्हें तैराकी, पेंटिंग , गीत-संगीत, कूकिंग आदि की अतिरिक्त शिक्षा दी
जा सकती है और उनके ऊर्जा का समुचित इस्तेमाल किया जा सकता है।
बच्चों
को मोबाइल से दूर रखने का प्रयास करें। अगर आप उनको अन्य रचनात्मक कार्यों में
व्यस्त रखेंगे तो मोबाइल की तरफ उनका ध्यान नहीं जाएगा। इस
दौरान बच्चों के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखें ताकि वे बीमार न हो जाये । उन्हें पौस्टिक भोजन एवं
मौसमी फल खाने को जरूर दें। पानी का अधिक सेवन भी फायदेमंद रहेगा। इन
सभी पर अमल कर के हम अपने बच्चे की छुट्टी का सही उपयोग कर सकते हैं। यह उनके लिए
एक यादगार लम्हा साबित होगा।
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