पार्क
में महिला मंडली
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शर्दी
का मौसम है देखो,
गुनगुनी
है धूप खिली,
महिला
मंडली जमी हुई है,
गप्पों
की बरसात हुई।
रोके
नहीं रुकते ठहाके,
खुलकर
जीने की बात चली,
काम
की कोई चिंता नहीं,
एंजॉयमेंट
की बस बात हुई।
यादगार
किस्से सुनाने की,
सब
में है बस होड़ लगी,
टेस्टी
डिसेज की चर्चा यहाँ,
रेसिपी
सेयर की बात हुई ।
पुराने
गाने गुनगुना कर ,
मजा ले रहे अंताक्षरी
का,
हाउजी
खेलते हुये फिरसे,
बचपन
की भी बात हुई।
जब
पेट में चूहे लगे दौड़ने,
मंडली
समाप्ती की ओर चली,
घर
से खाना लाये थे सब,
मिल- बाँट, खाने की बात हुई।
जय
हो महिला मंडली......
