फेसबुक फ्रेंड
मैं अपना फेसबुक अकाउंट रोज चेक करती हूँ । इसके लिए मै प्राय: अपने लैपटॉप का प्रयोग करती हूँ तथा यदा-कदा मोबाइल के माध्यम से भी फेसबुक चेक कर लेती हूँ। पिछले तीन-चार दिनों से अधिक व्यस्तता के कारण मुझे लैपटॉप ऑन करने का मौका नहीं मिला तथा मोबाइल में कुछ तकनीकी समस्या होने के कारण मैं उसका भी प्रयोग नहीं कर पाई।
कल रविवार की छुट्टी है और काम का दबाव भी नहीं है। यह सोच कर ऑफिस से आते ही मैंने अपना फेसबुक पेज ओपन किया और दोस्तों के पोस्ट देखने बैठ गई। दो तीन दोस्तों के पोस्ट देखते और लाइक करते हुए मैं आगे बढ़ती चली गई। अगला मैसेज रिया का था, जिसे अभी कुछ मिनट पहले ही पोस्ट किया गया था। इसे पढ़कर मैं सन्न रह गई। हमेशा खुश रहने वाली तथा व्यंगात्मक मैसेज भेजने वाली रिया का मैसेज आज आशा के विपरित था। “लोगों ने मुझे रिजेक्ट किया, आज मैं सबको रिजेक्ट करती हूँ। गुड बाई !” इसके साथ एक फोटो भी पोस्ट किया गया था, जिसे देख कर मैंने तुरंत उसे ऑनलाइन ढूँढना शुरू कर दिया। अपनी आदत के अनुसार वह ऑनलाइन चैट के लिए उपलब्ध थी। मैंने चैटिंग शुरू कर दी।
लुधियाना में रहने वाली रिया की पिछले महीने ही एक एन.आर.आई. लड़के परविंदर से सगाई हुई थी। वह बहुत खुश थी। सगाई में शामिल होने के लिए मेरे पास भी निमंत्रण पत्र आया था, किन्तु व्यस्तता के कारण मैं कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाई। अगले महीने की दस तारीख को उसकी शादी होने वाली थी और वह हमेशा के लिए कनाडा शिफ्ट होने वाली थी, किन्तु इसी बीच पता चला की परविंदर ने कनाडा की एक स्थानीय लड़की से शादी कर ली है। यह खबर सुन कर वह बिल्कुल टूट गई। उसके सारे सपने कांच की तरह बिखर गए। वह बिल्कुल अकेली हो गई। इस मुश्किल घड़ी में उसे सहारा देने वाला कोई नहीं था। उसके मम्मी-पापा भी पिछले चार-पांच दिनों से कहीं बाहर गए थे और वह अपना गम फेसबुक के माध्यम से दोस्तों से शेयर कर रही थी। किन्तु उसे कहीं से भी भावनात्मक सपोर्ट नहीं मिल पा रहा था। इस कारण वह जीवन से निराश हो चुकी थी और इस दुनिया में नहीं रहना चाहती थी। चैटिंग के दौरान मैंने महसूस किया कि उसे मोरल सपोर्ट की सख्त जरूरत है, वरना वह बिल्कुल ही टूट जाएगी।
मैंने टैक्सी बुलाई और लैपटॉप पर चैटिंग करते हुए रिया के घर की तरफ रवाना हो गई। चंडीगढ़ से लुधियाना तक के दो घंटे के सफर के दौरान मैंने लगातार चैटिंग करते हुए उसे व्यस्त रखा।
मैं उसके दरवाजे के बाहर खड़ी थी। रिया को शायद दरवाजा बंद करने का भी होश नहीं रहा। हल्के धक्के से ही दरवाजा खुल गया। मैं रिया को ढूंढ़ते हुए उसके बेडरूम में पहुंच गई। वह लैपटॉप पर मुझसे चैटिंग में व्यस्त थी, किन्तु कमरे का नजारा सब कुछ बयान कर रहा था। दुपट्टे से बना हुया फांसी का फंदा पंखे से लटक रहा था तथा बेड पर प्लास्टिक का एक छोटा-सा स्टूल रखा हुआ था। मुझसे चैटिंग शुरू करने से पहले वह सुसाइट करने की पूरी तैयारी कर चुकी थी। मुझे देखते ही वह मुझ से लिपट गई और फूट-फूट कर रोने लगी। कहते है कि आंसू के माध्यम से हमारे सारे दर्द पानी बन कर निकल जाते हैं। रिया के दर्द भी आंसुओं के माध्यम से निकलते जा रहे थे।
मैंने अपने दोस्त को मौत के मुंह से निकाला था। किसी के लिए कुछ अच्छा करने पर कितना शुकून मिलता है, उसका एहसास पा कर मैं आनंदित हो रही थी। रिया के दर्द के आंसुओं के साथ मेरे खुशी के आंसू मिश्रित हो रहे थे।