*******************
सत्य सरोज
********************
********************
अज्ञान के अंधियारे में,
तुम ज्ञान का दीप जलाओ,
तमस मिटाओ द्वेष का,
तुम प्रेम का दीप जलाओ.
मानवता के फूल खिला,
आशा की किरण जगाओ,
अंतर्मन का दीप जला,
जग ज्योतिर्मय कर जाओ.
माया मोह का बंधन तोड़,
लालच से नाता तोड़ो ,
मन मंदिर की शुद्धि को,
संकल्प का दीप जलाओ.
सच्चाई की राह पकड़,
दीवार गिराओ नफ़रत की,
बन मशाल भटके राही को,
अब तुम राह दिखाओ.
जात पात का भेद मिटा,
प्यासे की प्यास बुझाओ,
कभी नहीं जो बुझ पाए,
एक ऐसा दीप जलाओ.
वाणी पर हो संयम अपने,
सबके मन को हर्षाओ,
ज्योत हमेशा रहे अमर,
तुम ऐसा दीप जलाओ.
*******************

6 comments:
Great
Nice creation ....
सामयिक और सुंदर रचना .... 💐💐
Gud
अति उत्तम 👍👍👍
SK
Bahot khoob sir.... Keep it up... Ban Mashaal Bhatke Raahi Ko bas yunhi nirantar rah dikhaate rahiye.... Good Efforts
Achha likhe hain..
Post a Comment