माँ तुम्हारे चरणों में
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दुनिया
के इस भीड़ में,
याद बहुत आती है माँ।
अंजान
सफर के तेज धूप में,
सुरमई
छांव बन जाती है माँ।
लंबे
सफर का घना अंधेरा,
जब भी
मुझे डराता है,
बचपन
में सिखाई तेरी बातें,
मुझको
राह दिखता है।
इस जालिम
दुनिया ने मुझको,
जब जब
है दुख दर्द दिया,
तुम्हारे
स्नेहिल स्पर्श ने ही,
सारे
दुख दर्द का नाश किया ।
जब मैं
था बड़ी मुसीबत में,
भगवान
को ढूँढा मंदिर में,
भगवान
से पहले माँ आई,
जो है
मेरे मन मंदिर में।
जाने
क्यों लोग इस दुनिया में,
भगवान
को पूजा करते हैं,
जन्नत
तो मैंने पाया है,

6 comments:
Great
Beautiful poem. Gratitude for mother. Great writing.
🌿🌿 very nice.🌿🌿
Beautiful poem and reality of life👌
🤩🤩👏👏👏👏🙏
सुन्दर
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