Sunday, 26 January 2025


मन की परिभाषा
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मन की ...क्या मैं दूँ परिभाषा

कभी ये है आशा.. कभी है  निराशा...
मन की ...क्या मैं दूँ परिभाषा...

 

कभी ये आसमान को छूने,

पंछी बन उड़ जाए ...

इस पल यहाँ तो,  उस पल वहाँ,
वश में किसी के न आये,

चाहे तो ये, कुछ भी कर जाए ,

रहे गतिशील ये हमेशा...

मन की ...क्या मैं दूँ परिभाषा

कभी ये है आशा.. कभी है  निराशा...


यादों को ये रखता संभाले
बेमतलब में उछाले..
रातों को हमें ये जगाता
सपनों को पूरा कर जाता
पुरे न हो सपने कभी तो ...

देता है ये हमको दिलाशा ...

मन की ...क्या मैं दूँ परिभाषा

कभी ये है आशा.. कभी है निराशा...

मन तो है जैसे समंदर 

सुख- दुख सब इसके अंदर 

रंगीन सपने है बुनता  

ये नहीं किसी की भी सुनता,  

पूरी करता है सबकी ये आशा,  

नहीं इसकी है कोई भी भाषा...  

मन की ...क्या मैं दूँ परिभाषा   

कभी ये है आशा.. कभी है  निराशा...


मन की ...क्या मैं दूँ परिभाषा  

कभी ये है आशा.. कभी है  निराशा...



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