Thursday, 12 March 2026

श्रीनगर का ट्यूलिप गार्डन एक बार जरूर जाएं..

यात्रा अनुभव .

 (मन को छुए बगैर नहीं रहता ट्यूलिप गार्डन)

 जम्मू कश्मीर का विश्व प्रसिद्द ट्यूलिप गार्डन 16 मार्च से आम जनता और पर्यटकों के लिए खुल जाएगा  जो अगले बीस दिनों तक पर्यटकों के मन को प्रफुल्लित करता रहेगा  

कश्मीर अपने प्राकृतिक खुबसूरती के लिए जाना जाता है और इसे धरती का स्वर्ग भी कहा जाता है। प्रकृति ने यहाँ जी भर के अपना सौंदर्य लुटाया है। 

 


यहाँ की खुबसूरती इस शहर को  देश का सर्वश्रेष्ठ पर्यटक स्थल बनती है।  सदियों से यह शहर डल झील , हरी भरी वादियोंवर्फीली पहाड़ियों तथा अपने सुन्दर बगीचों के लिए पहचाना जाता था जो अब ट्यूलिप गार्डन के लिए पहचाना जाने लगा है।  वर्तमान कश्मीर में ट्यूलिप गार्डन अपनी नैसर्गिक सुंदरता के कारण शहर की खुबसूरती में चार चाँद लगता है। ट्यूलिप गार्डन को हाल ही में वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में शामिल किया गया हैं 

  एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डेन इन्दिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डेन प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी मार्च -अप्रैल में पर्यटकों के लिए खुला रहेगा। कुछ साल पहले तक फिल्मों में  दिखाये जाने वाले हालैण्ड के ट्यूलिप गार्डन को देख कर वहाँ घूमने की मेरी इच्छा कभी पूरी नहीं हो पाई थी परंतु श्री नगर में इस गार्डन के निर्माण के बाद ट्यूलिप गार्डन देखने का सपना अब सपना नहीं वल्कि हकीकत का रूप ले चुका था ।

 कुछ वर्ष पहले मुझे भी कुछ मित्रों के साथ पहली बार ट्यूलिप गार्डन देखने का मौका मिला। डल गेट से टैक्सी में बैठ कर जैसे ही हम आगे बढे,  लेक में तैरता शिकारा और आस पास का नजारा एक बहुत ही सुन्दर दृश्य प्रस्तुत कर रहा था ।

 

मुख्य शहर से डल लेक के साथ रास्ते में आए अनेकों मनोरम दृश्यों को देखते हुये तथा ठंढी हवा का आनंद लेते हुए हम लोग काफी रोमांचित थे और इसकी सुन्दरता को अपने आँखों के साथ साथ अपने कैमरे में भी कैद करते जा रहे थे । 


जब 9 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद हम इस गार्डन में पहुंचे तो ऐसा लगा मानो अब तक हमने जो भी देखा थावह इस गार्डन की सुंदरता के सामने कुछ भी नहीं था । इस गार्डन के बारे में जो जानकारी मिली उसके अनुसार, जब्रवान  पहाड़ियों की तलहट्टी में 90 एकड़ से भी अधिक क्षेत्र में फैले इस सुंदर गार्डन का निर्माण कश्मीर पर्यटन को बढ़ावा देने के उदेश्य से 2007 ई में कराया गया। श्री नगर में मुगल काल के बाद का यह सबसे बेहतर निर्माण कार्य है। इसमें 70 से अधिक किश्मों के 20 लाख से अधिक ट्यूलिप के फूल एक बार में देखे जा सकते है।यहाँ अलग अलग क्यारियों में खिले लालपीलेसफेदनीलेगुलाबीबैंगनीहरेनारंगी आदि विभिन्न रंगों के ट्यूलिप मन को मोह लेते है । 

डल झील के किनारे बने इस गार्डन को पहले सिराज बाग के नामे से जाना जाता था जो 2008 ई के बाद ट्यूलिप गार्डन के नाम से देश विदेश में विख्यात हो गया।  मात्र आठ वर्ष के अंदर की यह उद्यान कश्मीर की नई पहचान बन गई है।

 शालीमार , निशात गार्डन तथा चश्मेशाही आदि तो पहले भी देखे थे किन्तु इस गार्डन को देखने के बाद समझ में आया की क्यों इसने अन्य सभी गार्डन को पीछे छोड़ दिया है। अपनी अद्वितीय सुंदरता के कारण यह गार्डन देश विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस गार्डन की मोहकता एवं लोकप्रियता के कारण प्रत्येक वर्ष लगभग 2 लाख से अधिक पर्यटक इस गार्डन को देखने के लिए श्री नगर आते हैं।

 जब हम इन ट्यूलिप के सतरंगी क्यारियों को दूर से देखते है तो ये हमें एक इंद्रधनुष का दृश्य प्रस्तुत करता हैं। सदियों से डल झील तथा अन्य बागों के लिए पहचाना जाने वाला श्री नगर को अब ट्यूलिप गार्डन के लिए पहचाना जाने लगा है। वसंत ऋतु में खिलने वाला यह फूल गंध रहित होता है परंतु अपने मनमोहक रंगो एवं एकरूपता के कारण सभी को अपनी ओर आकर्षित करता है।  इन फूलों का जीवन काल 15 से 20 दिनों का होता है और प्रायः यह मध्य मार्च से अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक खिले रहते हैं।

 क्योंकि शुरुआत में ही पहुँच गये थे, अतः हमने ट्यूलिप उत्सवका पूरा आनंद उठाया ।  इस दौरान हमें स्थानीय हस्तशिल्प की एक विस्तृत शृंखला देखने को मिली जिसमें से हमने अपने पसंद के अनुसार खरीदारी की। इसके अतिरिक्त स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किये गए लोक नृत्य और लोक संगीत ने हमें आनंद विभोर कर दिया । हमने यहाँ परोसे जाने वाले स्थानीय पकवान का भी लुफ्त उठाया जिसका स्वाद हमेशा याद रहेगा।

 इसके बाद हम अपने होटल के कमरे में आ गए परन्तु गार्डन का दृश्य अभी भी आँखों के सामने था। हमने निश्चय किया की कल फिर इस गार्डन में जायेंगे और इसकी खुबसूरती का आनंद लेंगे ।  योजना के अनुसार हम दुबारा वहां पहुँच गए। हम यहाँ बने रेस्टोरेंट में बैठकर चाय की चुस्कियों के साथ यहाँ की सुन्दरता को आँखों में बसाते जा रहे थे।  हमारा वहां से हटने का मन नहीं कर रहा था, परन्तु वापस आना भी जरुरी था। अतः इस मनमोहक दृश्य को आँखों में बसाए हम वापस आ गए।  

 

यह दृश्य कई दिनों तक हमारे आँखों के सामने घुमता रहा। यह एक ऐसा अविस्मरणीय गार्डन हैं जिसकी यादें काफी लंबे समय तक हमारे स्मृति में बनी रहेगी।



(छाया चित्र एवं रचना: सत्य सरोज )

7 comments:

Sk said...

Very nice article 👍 . Keep it up.

Mukesh said...

Very nice

Unknown said...

Very Nice

Anonymous said...

Very nice

Anjali Basu said...

सर वास्तव में यह गार्डन अपने आप में एक मिसाल है। हमें भी गत वर्ष इसकी सुंदरता को देखने का मौका मिला जिसकी सुंदरता को चित्र रूप में संजो के रखा है ।

chandrashekhar kumar said...

Very nice

Anonymous said...

Leave sanction ho Jaye sir bas .. phir jarur jayenge 😇