बचपन के दिन
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माँ की आँखों का तारा,
थे पापा के
राजदुलारे,
बचपन के दिन कितने प्यारे,
आज बने हैं सपने सारे.
छोटी छोटी आँखें अपनी,
पर सपने थे बड़े
बड़े,
छोटे छोटे खेल खिलौने,
लगते थे सबसे
प्यारे,
गम नहीं कोई दुनिया का,
थी सारी खुशियाँ पास हमारे,
बचपन के दिन कितने प्यारे.
न टीवी न थी बिजली,
वो रेडिओ का ज़माना था,
पढ़ने बैठे छत पे रात को,
लालटेन का मात्र सहारा था,
चाहत थी चाँद को पाने की,
पर न रॉकेट
पास हमारे,
बचपन के दिन कितने प्यारे.
खेल था गिल्ली डंडे का,
कंचों का फैला मेला था,
नीले आसमां में
हमारे,
सतरंगी पतंग का रेला था,
बागें थी अम्बियों से लदी ,
और गुलेला
पास हमारे,
बचपन के दिन कितने प्यारे.
न खबर थी शाम की,
न दिन का ठिकाना था,
दादी की कहानियों का,
भरा पूरा
खजाना था,
चाचा चाची, दादा दादी,
रहते थे सब साथ हमारे,
बचपन के दिन कितने प्यारे.
आज बने हैं सपने सारे.




4 comments:
Bejod👌
Bejod👌
Ati uttam
Atulya
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